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सैंणराथी-बेड़ूमहर सड़क ने मचाई थी तबाही
Updated Thu, 23 Aug 2018 10:49 PM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। भूमि संरक्षण और राजस्व विभाग की टीम ने तल्ला जोहार के चार गांवों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने पाया कि सैंणराथी-बेड़ूमहर सड़क के चलते गांवों की उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचा। टीम ने कहा कि यदि अब भी सड़क किनारे कलवर्ट नहीं बनाए गए तो गांवों को गंभीर खतरा हो सकता है।
कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी डीडीहाट अनिल कुमार के नेतृत्व में टीम ने बृहस्पतिवार को तल्ला जोहार के सैंणराथी, बेड़ूमहर, देकुना और बोरागांव का निरीक्षण किया। बेड़ूमहर और सैंणराथी के निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि गांवों की साढ़े तीन हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। टीम ने इसका कारण सैंणराथी-बेड़ूमहर सड़क को बताया। लोनिवि ने पिछले वर्ष इस सड़क की कटिंग कर छोड़ दिया।
सड़क किनारे दीवार, स्क्रबर नहीं होने से बारिश के पानी ने तबाही मचाई। इससे पेयजल, सिंचाईं गूल और उपजाऊ जमीनें बर्बाद हो गईं। साथ ही सैंणराथी और बेड़ूमहर के दर्जनों मकान खतरे की जद में आ गए हैं। किमखेत के भी 10 परिवारों की आधा हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई है। देकुुना और बोरागांव आपदा से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं। टीम में राजस्व उप निरीक्षक गोपाल दत्त जोशी, ग्राम पंचायत अधिकारी जगत कोरंगा, जेई दीपक धानिक, ग्राम विकास अधिकारी आशुतोष बाफिला शामिल थे।
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कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी डीडीहाट अनिल कुमार के नेतृत्व में टीम ने बृहस्पतिवार को तल्ला जोहार के सैंणराथी, बेड़ूमहर, देकुना और बोरागांव का निरीक्षण किया। बेड़ूमहर और सैंणराथी के निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि गांवों की साढ़े तीन हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। टीम ने इसका कारण सैंणराथी-बेड़ूमहर सड़क को बताया। लोनिवि ने पिछले वर्ष इस सड़क की कटिंग कर छोड़ दिया।
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सड़क किनारे दीवार, स्क्रबर नहीं होने से बारिश के पानी ने तबाही मचाई। इससे पेयजल, सिंचाईं गूल और उपजाऊ जमीनें बर्बाद हो गईं। साथ ही सैंणराथी और बेड़ूमहर के दर्जनों मकान खतरे की जद में आ गए हैं। किमखेत के भी 10 परिवारों की आधा हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई है। देकुुना और बोरागांव आपदा से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं। टीम में राजस्व उप निरीक्षक गोपाल दत्त जोशी, ग्राम पंचायत अधिकारी जगत कोरंगा, जेई दीपक धानिक, ग्राम विकास अधिकारी आशुतोष बाफिला शामिल थे।
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