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43 वर्ष से लोगों को हंसा रहा कुसिया जोकर
ब्यूरो/अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)।
Updated Thu, 15 Oct 2015 10:26 PM IST
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असल जिंदगी में हमेशा परेशान रहने वाले कुंदन राम पिछले 43 वर्ष से रामलीला के समय सैकड़ों की संख्या में उपस्थित जनसमूह को जमकर गुदगुदाते हैं।
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आज लोग कुंदन राम का असली नाम भूल गए हैं, लेकिन उनको कुसिया जोकर के नाम से सभी जानते हैं। थल बाजार में छोटी सी टेलरिंग की दुकान चलाने वाले कुसिया जोकर की हाजिर जवाबी का कोई मुकाबला नहीं है।
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वह ऐसी तुकबंदी करते हैं कि लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। इस बार भी थल की रामलीला में कुसिया जोकर के डायलॉग लोगों को सुनने को मिलेंगे।
61 वर्षीय कुसिया जोकर बताते हैं कि 18 वर्ष की उम्र में वह रामलीला के मंच पर जोकरिंग करने लगे थे। उस दौर में शिरोमणि जोकर की बड़ी ख्याति थी।
कुछ लोग तो रामलीला नहीं वरन शिरोमणि जोकर के डायलॉग सुनने आते थे। उससे पहले थल की रामलीला में कानू जोकर का सिक्का चलता था।
मूल रूप से डनौला गांव निवासी कुसिया जोकर कहते हैं कि किसी को हंसाना या फिर पूरे समाज को हंसाना किसी कला से कम नहीं है। ऐसा गुण सभी लोगों में नहीं होता कि वह अपने दुखों को भुलाकर दूसरे को हंसा दें।
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कुसिया जोकर कहते हैं कि हंसना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि वह रामलीला में जोकरिंग के लिए पहले से कोई तैयारी नहीं करते। जिस तरह का माहौल बना वैसी ही तुकबंदी कर लोगों को हंसा दिया जाता है।
कुसिया ने बताया कि टेलरिंग से अब खास आमदनी नहीं होती। लोग रेडीमेड कपड़े ज्यादा पहनने लगे हैं। फिर भी वह कहते हैं कि ईश्वर ने उनको जोकरिंग का हुनर दे रखा है। उसे हर बार की रामलीला में जरूर निभाएंगे।