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हिमालयी क्षेत्र की 414 प्रजातिययों पर मंडरा रहा खतरा:डॉ. रावल
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। हिमालयन ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट में आयोजित तीन दिवसीय साइंस आउटरीच कार्यक्रम के अंतिम दिन हिमालय पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल (अल्मोड़ा) के निदेशक डॉ. रनवीर सिंह रावल ने बताया कि किस तरह से जैव विविधता हिमालय की पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में अपना योगदान करती है।
डॉ. रावल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पादप बहुत मात्रा में पाए जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि न सिर्फ इनका संरक्षण किया जाए बल्कि इनके बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र की जाए। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में 414 प्रजातियां ऐसी हैं, जिन पर खतरा मंडरा रहा है। यह प्रकृति के लिए अच्छा संदेश नहीं है। इनमें से यदि एक भी प्रजाति नष्ट होती है तो उसका दोबारा मिलना नामुमकिन हो जाएगा। उन्होंने संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को समझाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इन विषयों पर गहनता से अध्ययन करने की जरूरत है। पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीएस महर ने कहा कि विज्ञान प्रकृति के नियमों को समझने की विधा है। प्रकृति के नियमों से हमें ज्ञान मिलता है।
राजकीय इंटर कॉलेज पगन्ना बागेश्वर के प्रधानाचार्य बीएस कोरंगा ने गणित के मूलभूत सिद्धांत, इनके सरल और आसान तरीके बताते हुए विज्ञान में गणित के महत्व पर प्रकाश डाला। समापन पर प्रतिभागी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अनुभवों को साझा किया। पद्मभूषण प्रोफेसर केएस वल्दिया ने अनेक प्रेरक प्रसंगों से विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत और लगन के साथ कार्य करने से ही सही मुकाम प्राप्त किया जा सकता है। संस्थाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कार्यक्रम की सफलता के लिए वैज्ञानिकों, सहयोगी सदस्यों का आभार जताया। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर शेखर पाठक, प्रोफेसर बीडी लखचौरा, डॉ. किशन राणा, दिनेश भट्ट, किशोर पाटनी आदि मौजूद थे।
डॉ. रावल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पादप बहुत मात्रा में पाए जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि न सिर्फ इनका संरक्षण किया जाए बल्कि इनके बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र की जाए। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में 414 प्रजातियां ऐसी हैं, जिन पर खतरा मंडरा रहा है। यह प्रकृति के लिए अच्छा संदेश नहीं है। इनमें से यदि एक भी प्रजाति नष्ट होती है तो उसका दोबारा मिलना नामुमकिन हो जाएगा। उन्होंने संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को समझाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इन विषयों पर गहनता से अध्ययन करने की जरूरत है। पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीएस महर ने कहा कि विज्ञान प्रकृति के नियमों को समझने की विधा है। प्रकृति के नियमों से हमें ज्ञान मिलता है।
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राजकीय इंटर कॉलेज पगन्ना बागेश्वर के प्रधानाचार्य बीएस कोरंगा ने गणित के मूलभूत सिद्धांत, इनके सरल और आसान तरीके बताते हुए विज्ञान में गणित के महत्व पर प्रकाश डाला। समापन पर प्रतिभागी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अनुभवों को साझा किया। पद्मभूषण प्रोफेसर केएस वल्दिया ने अनेक प्रेरक प्रसंगों से विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत और लगन के साथ कार्य करने से ही सही मुकाम प्राप्त किया जा सकता है। संस्थाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कार्यक्रम की सफलता के लिए वैज्ञानिकों, सहयोगी सदस्यों का आभार जताया। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर शेखर पाठक, प्रोफेसर बीडी लखचौरा, डॉ. किशन राणा, दिनेश भट्ट, किशोर पाटनी आदि मौजूद थे।
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