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ऐसे तकनीकी संस्थान का क्या फायदा
Updated Sat, 08 Dec 2018 10:52 PM IST
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। तकनीकी शिक्षा देने के लिए खोले गए कनालीछीना पॉलीटेक्निक कॉलेज की दशा बहुत ही खराब है। एकमात्र इलैक्ट्रिकल ट्रेड के सहारे चल रहे कॉलेज में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, व्याख्याता के साथ ही बाबू के पद खाली हैं। कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मी तक नहीं हैं।
कनालीछीना में वर्ष 2008 में पॉलीटेक्निक कॉलेज खोला गया। शुरुआत से ही कॉलेज में अवस्थापना व्यवस्थाओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया और कॉलेज स्टाफ की कमी से जूझता रहा। वर्ष 2016 तक यहां प्रधानाचार्य की तैनाती थी। 78 छात्रसंख्या वाले कॉलेज में अब प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। विभागाध्यक्ष विज्ञान, इलैक्ट्रिकल के साथ ही व्याख्याता अंग्रेजी, गणित, रसायन विज्ञान और इलैक्ट्रिकल के दो प्रवक्ता, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त हैं। कॉलेज में चपरासी के भी तीन पद रिक्त हैं।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पॉलीटेक्निक में मेकेनिकल ट्रेड को मंजूरी देने की घोषणा की। यह घोषणा धरातल पर नहीं उतरी। छह महीने पहले कॉलेज चार करोड़ रुपये की लागत से बने भवन में शिफ्ट हुआ है। इस भवन में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यवस्थाओं के अभाव में यह भवन भी सफेद हाथी ही साबित हो रहा है।
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स्टाफ की कमी से पढ़ाई में व्यवधान आ रहा है। स्टाफ की तैनाती के लिए प्रस्ताव लगातार भेजे जा रहे हैं। स्टाफ तैनात होने की उम्मीद है। -हरीश चंद्र, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, कनालीछीना पॉलीटेक्निक कॉलेज
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कनालीछीना में वर्ष 2008 में पॉलीटेक्निक कॉलेज खोला गया। शुरुआत से ही कॉलेज में अवस्थापना व्यवस्थाओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया और कॉलेज स्टाफ की कमी से जूझता रहा। वर्ष 2016 तक यहां प्रधानाचार्य की तैनाती थी। 78 छात्रसंख्या वाले कॉलेज में अब प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। विभागाध्यक्ष विज्ञान, इलैक्ट्रिकल के साथ ही व्याख्याता अंग्रेजी, गणित, रसायन विज्ञान और इलैक्ट्रिकल के दो प्रवक्ता, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त हैं। कॉलेज में चपरासी के भी तीन पद रिक्त हैं।
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वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पॉलीटेक्निक में मेकेनिकल ट्रेड को मंजूरी देने की घोषणा की। यह घोषणा धरातल पर नहीं उतरी। छह महीने पहले कॉलेज चार करोड़ रुपये की लागत से बने भवन में शिफ्ट हुआ है। इस भवन में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यवस्थाओं के अभाव में यह भवन भी सफेद हाथी ही साबित हो रहा है।
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स्टाफ की कमी से पढ़ाई में व्यवधान आ रहा है। स्टाफ की तैनाती के लिए प्रस्ताव लगातार भेजे जा रहे हैं। स्टाफ तैनात होने की उम्मीद है। -हरीश चंद्र, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, कनालीछीना पॉलीटेक्निक कॉलेज