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ओलावृष्टि, अतिवृष्टि को भी आपदा की श्रेणी में रखा जाए

Wed, 21 Jun 2017 10:55 PM IST
Updated Wed, 21 Jun 2017 10:55 PM IST
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ओलावृष्टि, अतिवृष्टि को भी आपदा की श्रेणी में रखा जाए
ओलावृष्टि, अतिवृष्टि को भी आपदा की श्रेणी में रखा जाए
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। बेड़ीनाग के डोलडुंगरी गांव में कर्ज में डूबे किसान की आत्महत्या के बाद किसानों के बीच अब तरह-तरह के मुद्दे उठने लगे हैं। किसान चाहते हैं कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि को भी आपदा की श्रेणी में रखा जाए। पहाड़ का किसान फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन के लिए भी बैंक से कर्ज लेता है, लेकिन ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से हमेशा सब्जियां नष्ट हो जाती हैं।

बैंकों की किश्त किसान सब्जी बेचकर ही अदा करते हैं, लेकिन जब फसल की बर्बाद हो जाए तो उनके पास कोई रास्ता नहीं बचता। किसानों का कहना है कि डोलडुंगरी के सुरेंद्र सिंह की मौत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और यह कोशिश होनी चाहिए कि इसके बाद पहाड़ के किसान को राहत देने वाली नीति सामने आ जानी चाहिए। पहाड़ के किसी भी किसान की माली हालत ठीक नहीं है। वह प्रकृति की मार और जंगली जानवरों के आतंक से परेशान है।
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किसानों को राहत देने वाली नीति बने
किसान सुनील साह का कहना है कि सरकार हर विभाग के लिए मदों का निर्धारण तो करती है, लेकिन किसान हमेशा हाशिये पर रहता है। विडंबना यह है कि किसान को किसी भी स्तर से कोई राहत नहीं मिलती। सरकार जंगली जानवरों से मुक्ति दिलाने के लिए बड़े-बड़े एलान करती जाती है, लेकिन इनको कभी लागू नहीं किया जाता। किसान सबसे ज्यादा संकट में है।
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किसान को परेशान न किया जाए
डीडीहाट निवासी किसान दीपक कन्याल का कहना है कि सरकार की नीतियों से छोटी जोत वाला किसान ज्यादा दिक्कत में है। बैंक से कर्ज भी छोटा किसान ही लेता है। बाद में उसके सामने कर्ज जमा करने की समस्या आती है। सरकार को चाहिए कि हर नीति छोटे किसान के हितों को ध्यान में रखकर बनाए और किसान को कर्ज के मामले में कम से कम परेशान किया जाए।

सरकार के निर्देश नहीं मानते बैंक
किसान प्रकाश बोरा का कहना है कि बैंकों के अपने नियम और गाइडलाइन होती है। यदि सरकार कोई नियम बनाती है तो बैंक उसका पालन नहीं करते। बैंक अपने कारपोरेट आफिस के लिए जिम्मेदार होते हैं। सरकार के नियमों को मानने के लिए वह बाध्य नहीं दिखते। सरकार यदि कोई नीति बनाए तो बैंकों के पास स्पष्ट निर्देश आ जाने चाहिए। तभी किसान को राहत मिलेगी।


कहीं और किसान गलत कदम न उठाएं
डोलडुंगरी की घटना के प्रति सरकार का अब तक का रवैया ठीक नहीं है। किसान दीवान सिंह कहते हैं कि सरकार की इस नीति के कारण कहीं और किसान भी गलत कदम न उठा दें, क्योंकि कर्ज के बोझ से सभी दबे हुए हैं। यह मामला गंभीर है और सरकार को तत्काल घोषणा करनी चाहिए तथा सभी किसानों के कर्ज माफ करने चाहिए। अन्यथा स्थिति विस्फोटक हो जाएगी।
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