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36 घंटे तक तड़पती रही प्रसव पीड़िता
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sat, 02 Jul 2016 10:56 PM IST
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प्रसव पीड़िता कमला देवी
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ पर आई आपदा से लोगों की जान पर बन आई है। सड़क बंद होने के साथ अस्पताल में इलाज की उचित व्यवस्था न होने का खामियाजा पहाड़ के लोग भुगत रहे हैं। रसियाबगड़ से शुक्रवार सुबह पांच बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर लाई गई प्रसव पीड़िता कमला देवी को 36 घंटे तक कोई इलाज नहीं मिल पाया। अस्पताल में किसी प्रकार की सुविधा न होने के कारण महिला 36 घंटे तक तड़पती रही।
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थल-पिथौरागढ़ रोड बंद होने के कारण इन लोगों के सामने ज्यादा मुसीबत आ गई। कमला के साथ आए उसके ससुर महेंद्र सिंह ने बताया कि वह बहू को शुक्रवार सुबह पांच बजे अस्पताल ले आए थे। इलाज नहीं मिला। जिला अस्पताल ले जाने के लिए रोड बंद थी। बाद में वह शनिवार अपरान्ह बहू को तीन किलोमीटर पैदल लेकर आए। मलबा पार कराने के बाद उनको जिला अस्पताल के लिए गाड़ी मिली और वह पांच बजे जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए हैं। अस्पताल की हालत पर महेंद्र सिंह ने गंभीर चिंता जताई है।
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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
पिथौरागढ़। आपदाग्रस्त क्षेत्र बस्तड़ी, नौलड़ा में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। बस्तड़ी के पास स्थित अस्कोट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टर नहीं है। वहां फार्मेसिस्ट के हवाले अस्पताल है। डीडीहाट का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी प्राथमिक इलाज कराने में सक्षम है। यही कारण है कि शुक्रवार को हादसे के घायलों को हेलीकॉप्टर से जिला अस्पताल भेजना पड़ा।
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थल के पास नौलड़ा के कुमालगांव में भी तीन लोग मलबे में दब गए थे, जिनमें से दो के शव बरामद हो गए हैं। थल क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। थल के गौचर अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों का टोटा बना है। कई दशक से सीमांत क्षेत्र आपदा की मार झेल रहा है। लगभग हर साल बरसात की आपदा में सीमांत के लोगों की जान जाती है, लेकिन सरकार आपदाग्रस्त क्षेत्र में इलाज का पुख्ता इंतजाम नहीं कर पा रही है। लोगों को सरकार ने एक प्रकार से भगवान भरोसे छोड़ दिया है। आपदा प्रभावित क्षेत्र में सेना और आईटीबीपी के लोग लोगों को स्वास्थ्य सुविधा दे रहे हैं।