{"_id":"5904c8474f1c1b621dc0d245","slug":"26-buses-of-roadways-stand-due-to-lack-of-tire","type":"story","status":"publish","title_hn":"टायरों की कमी से रोडवेज की 26 बसें खड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टायरों की कमी से रोडवेज की 26 बसें खड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 29 Apr 2017 10:37 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़ में टायरों के अभाव में खड़ी रोडवेज की बसें
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तो हो गया है, लेकिन रोडवेज का सिस्टम सुधरने के बजाए और ज्यादा बिगड़ गया है। इस महीने टायरों की कमी से रोडवेज की 26 बसें खड़ी हो गई। कुछ बसों के लिए परिचालक न मिलने के कारण भी समस्या आ रही है। इस संकट से जूझ रहे पिथौरागढ़ के रोडवेज डिपो को रोजाना दिल्ली, देहरादून, बरेली की बस सेवाओं को रद्द करना पड़ रहा है। रोडवेज के स्थानीय डिपो की ओर से इस बार तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि टायरों की कमी से बसों के संचालन में भारी दिक्कत आ रही है। रोडवेज के अधिकारी लगातार परिवहन निगम मुख्यालय को डिमांड भेजते जा रहे हैं, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
पिथौरागढ़ डिपो में कुल 108 बसों का बेड़ा है। इनमें से 82 बसों का ही इस समय संचालन हो पा रहा है। पिछले दिनों यहां कुछ नई बसें जरूर पहुंची थी, लेकिन पहले से संचालित बसों के लिए टायरों की कमी हो गई है। इसके अलावा हल्द्वानी, भवाली, टनकपुर और लोहाघाट डिपो की बसें भी इस जिले में संचालित होती हैं। टायरों की कमी से अधिकारी और कर्मचारी दोनों परेशान हैं।
विज्ञापन
अब तक प्रदेश की नई सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवा में सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। जानकारी मिली है कि पिछले महीने टायरों के अभाव में 40 बसों का संचालन नहीं हो पाया था। रोडवेज के प्रभारी बालकृष्ण ने स्वीकार किया कि टायरों की कमी से समस्या आ रही है। जब तक नए टायर नहीं आ जाते तब तक समस्या बनी रहेगी।
विज्ञापन
प्राइवेट वाहन चालकों की मनमानी बढ़ी
रोडवेज बसों के संचालन में आ रही दिक्कतों का फायदा प्राइवेट वाहन चालक उठा रहे हैं। टनकपुर, हल्द्वानी को जाने वाली जीप के चालक लोगों की मजबूरी का जमकर फायदा उठाते हैं। उनसे अधिक किराया वसूला जाता है और समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचाया जाता। लंबी दूरी पर जाने वाले रोडवेज बस से सफर करना ही वरीयता में रखते हैं, लेकिन अक्सर उनको बस न मिलने के कारण प्राइवेट वाहनों से सफर करना पड़ता है।