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Pithoragarh News: एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने से इलाज के लिए 20 किमी की दौड़
Sun, 14 Jan 2024 10:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 14 Jan 2024 10:38 PM IST
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पिथौरागढ़। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पीपली में एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। यहां के लोगों को इलाज के लिए 20 किमी दूर कनालीछीना जाना पड़ता है। सरकार से कई बार अस्पताल की मांग करने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
पीपली, बचकोट और डौड़ा क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। पीपली में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ आयुर्वेदिक अस्पताल है। उसमें भी डॉक्टर का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। घाटी क्षेत्र होने के कारण लोगों को सामान्य शारीरिक समस्याओं के अलावा गर्मियों में संक्रामक बीमारियां होने का खतरा रहता है।
इसके अलावा हर साल सर्पदंश की घटनाएं होती हैं लेकिन एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने के कारण लोगों को आपात स्थिति में 20 किमी दूर कनालीछीना या फिर 45 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की जान पर भी बन आती है। इन समस्याओं को देखते हुए क्षेत्र के लोग लंबे समय से एलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
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मुख्यमंत्री को साैंपा मांगपत्र
पिथौरागढ़। जिला पंचायत सदस्य दीपिका भट्ट और सामाजिक कार्यकर्ता भूपाल दत्त भट्ट ने बताया कि एलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग को लेकर उन्होंने देहरादून जाकर मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा है। उन्होंने अस्पताल खोलने को लेकर शीघ्र उचित कार्यवाही का भरोसा दिया है। संवाद
दो साल से खाली है चिकित्सक का पद
पिथौरागढ़। पीपली क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर स्थापित आयुर्वेदिक अस्पताल भी उपेक्षित है। वहां दो साल से चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। सिर्फ फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय अस्पताल में कार्यरत हैं। संवाद
रीठा पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी को चार माह से नहीं मिला मानदेय
रीठासाहिब (चंपावत)। जिले में कई संविदा चिकित्सकों को चार माह से मानदेय नहीं मिला है। इन्हीं में रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संविदा पर तैनात चिकित्सा प्रभारी भी शामिल हैं।
दूसरे राज्यों से आए चिकित्सक अपनी सेवाएं देकर पहाड़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। रीठा साहिब क्षेत्र में तैनात एकमात्र चिकित्सक डॉ. नरेश कुमार गौतम पर 20 हजार की आबादी के इलाज का जिम्मा हैं। रीठा साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं के उपचार का जिम्मा भी उन पर रहता है। वह विभाग से लगातार मानदेय की गुहार लगा रहे हैं लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिकित्सकों का मानदेय प्रमुखता से दिया जाना चाहिए। संवाद
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विभाग को संविदा चिकित्सकों का मानदेय प्राथमिकता के साथ देना चाहिए। विभाग मानदेय न देकर उनकी और उनके परिवार की मुश्किल बढ़ा रह है। - हयात राम, पीएलवी, रीठा साहिब।
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मानदेय को लेकर डीजी हेल्थ को पत्र भेजा गया है। डीजी हेल्थ से जैसे ही बजट मिलता है सभी संविदा चिकित्सकों के खाते में मानदेय की राशि डाल दी जाएगा। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
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पीपली, बचकोट और डौड़ा क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। पीपली में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ आयुर्वेदिक अस्पताल है। उसमें भी डॉक्टर का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। घाटी क्षेत्र होने के कारण लोगों को सामान्य शारीरिक समस्याओं के अलावा गर्मियों में संक्रामक बीमारियां होने का खतरा रहता है।
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इसके अलावा हर साल सर्पदंश की घटनाएं होती हैं लेकिन एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने के कारण लोगों को आपात स्थिति में 20 किमी दूर कनालीछीना या फिर 45 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की जान पर भी बन आती है। इन समस्याओं को देखते हुए क्षेत्र के लोग लंबे समय से एलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
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मुख्यमंत्री को साैंपा मांगपत्र
पिथौरागढ़। जिला पंचायत सदस्य दीपिका भट्ट और सामाजिक कार्यकर्ता भूपाल दत्त भट्ट ने बताया कि एलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग को लेकर उन्होंने देहरादून जाकर मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा है। उन्होंने अस्पताल खोलने को लेकर शीघ्र उचित कार्यवाही का भरोसा दिया है। संवाद
दो साल से खाली है चिकित्सक का पद
पिथौरागढ़। पीपली क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर स्थापित आयुर्वेदिक अस्पताल भी उपेक्षित है। वहां दो साल से चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। सिर्फ फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय अस्पताल में कार्यरत हैं। संवाद
रीठा पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी को चार माह से नहीं मिला मानदेय
रीठासाहिब (चंपावत)। जिले में कई संविदा चिकित्सकों को चार माह से मानदेय नहीं मिला है। इन्हीं में रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संविदा पर तैनात चिकित्सा प्रभारी भी शामिल हैं।
दूसरे राज्यों से आए चिकित्सक अपनी सेवाएं देकर पहाड़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। रीठा साहिब क्षेत्र में तैनात एकमात्र चिकित्सक डॉ. नरेश कुमार गौतम पर 20 हजार की आबादी के इलाज का जिम्मा हैं। रीठा साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं के उपचार का जिम्मा भी उन पर रहता है। वह विभाग से लगातार मानदेय की गुहार लगा रहे हैं लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिकित्सकों का मानदेय प्रमुखता से दिया जाना चाहिए। संवाद
विभाग को संविदा चिकित्सकों का मानदेय प्राथमिकता के साथ देना चाहिए। विभाग मानदेय न देकर उनकी और उनके परिवार की मुश्किल बढ़ा रह है। - हयात राम, पीएलवी, रीठा साहिब।
मानदेय को लेकर डीजी हेल्थ को पत्र भेजा गया है। डीजी हेल्थ से जैसे ही बजट मिलता है सभी संविदा चिकित्सकों के खाते में मानदेय की राशि डाल दी जाएगा। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।