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कछुआ गति से चल रही पुलिस की जांच
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:32 PM IST
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पिथौरागढ़। ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवरेज निकासी मामले में पुलिस की जांच कछुआ गति से चल रही है। एक माह से अधिक समय होने बाद भी पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा नहीं पाई है। न ही आरोपी और सभी गवाहों के बयान दर्ज हो पाए हैं, जबकि प्रदूषित आपूर्ति के बाद भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई में ढिलाई से नगरवासियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
पिथौरागढ़ में इस वर्ष 9 फरवरी को ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सैन्य अस्पताल का सीवरेज मिलने का मामला पकड़ में आया था। भारी जनदबाव को देखते हुए जल संस्थान की ओर से सैन्य अस्पताल के ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामला दर्ज हुए एक माह बीच चुका है, लेकिन पुलिस की जांच में अपेक्षित तेजी नजर नहीं आ रही है।
जांच में देरी से घटना से जुड़े साक्ष्यों के कमजोर होने की आशंका है। वहीं, आम जन, वरिष्ठ नागरिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने जांच में तेेजी लाने और दोषियों को दंडित करने की मांग की है।
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पानी के नमूनों से हाथ धो चुकी पुलिस
लापरवाही के चलते पिथौरागढ़ पुलिस पहले से ही एक अहम साक्ष्य से हाथ धो बैठी है। इस लापरवाही से केस कमजोर हो सकता है। दरअसल जांच के सिलसिले में पुलिस को दूषित पेयजल के नमूने लेने थे। नियमानुसार पुलिस को रुद्रपुर लैब में नमूनों की जांच करानी थी। यह दूषित पेयजल आपूर्ति का अहम साक्ष्य था। इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई। जल संस्थान द्वारा प्रदूषित गधेरे और पेयजल योजना की सफाई से पहले पुलिस ने नमूने नहीं लिए। इस कारण मामले से जुड़ा साक्ष्य पानी में बह गया। इससे पहले मुकदमा दर्ज करने के पखवाड़े भर बाद नमूने लेने पहुंची पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा था। जांच के लिए पुलिस के पास सीवर के दूषित पानी का कोई नमूना नहीं है।
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पिथौरागढ़ में इस वर्ष 9 फरवरी को ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सैन्य अस्पताल का सीवरेज मिलने का मामला पकड़ में आया था। भारी जनदबाव को देखते हुए जल संस्थान की ओर से सैन्य अस्पताल के ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामला दर्ज हुए एक माह बीच चुका है, लेकिन पुलिस की जांच में अपेक्षित तेजी नजर नहीं आ रही है।
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जांच में देरी से घटना से जुड़े साक्ष्यों के कमजोर होने की आशंका है। वहीं, आम जन, वरिष्ठ नागरिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने जांच में तेेजी लाने और दोषियों को दंडित करने की मांग की है।
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पानी के नमूनों से हाथ धो चुकी पुलिस
लापरवाही के चलते पिथौरागढ़ पुलिस पहले से ही एक अहम साक्ष्य से हाथ धो बैठी है। इस लापरवाही से केस कमजोर हो सकता है। दरअसल जांच के सिलसिले में पुलिस को दूषित पेयजल के नमूने लेने थे। नियमानुसार पुलिस को रुद्रपुर लैब में नमूनों की जांच करानी थी। यह दूषित पेयजल आपूर्ति का अहम साक्ष्य था। इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई। जल संस्थान द्वारा प्रदूषित गधेरे और पेयजल योजना की सफाई से पहले पुलिस ने नमूने नहीं लिए। इस कारण मामले से जुड़ा साक्ष्य पानी में बह गया। इससे पहले मुकदमा दर्ज करने के पखवाड़े भर बाद नमूने लेने पहुंची पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा था। जांच के लिए पुलिस के पास सीवर के दूषित पानी का कोई नमूना नहीं है।