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आज पकेंगे घुघुतिया पर्व के पकवान
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में घुघुतिया का पर्व मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। सोमवार की शाम विभिन्न पकवान बनाकर अगले दिन सुबह पहले कव्वों को भोग लगाया जाएगा। इसके बाद इन पकवानों का बच्चे आनंद उठाएंगे।
इस वर्ष घुघुतिया का त्योहार एक दिन विलंब से हो रहा है। पंचागों में मकर संक्रांति का पर्व 15 मंगलवार बताया गया है। इसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में घुघुतिया पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सोमवार शाम को घुघुतिया पर्व पर बनने वाले, ढाल, तलवार, दाड़िम, उड़द की पूड़ी, खीर, सिंगल आदि पकवान बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर आज भी कोल्हू में गन्ने की पिराई कर उसके रस से पहाड़ी चावलों में खीर पकाई जाती है।
अगले दिन सुबह बच्चे नहाकर और पूजा-अर्चना कर काले कव्वा काले, घुघती की माला खाले, आजा कव्वा आजा पूष की रोटी माघे खाजा के जयकारे से कव्वे का बुलाते हैं। जिस घर की छत पर रखे गए पकवानों को कव्वे खाते हैं उसे शुभ माना जाता है। दिलचस्प है कि इस दिन कव्वे भी दिखाई नहीं देते हैं।
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कहा जाता है कि कव्वे भी मकर संक्रांति के दिन सुबह बागेश्वर में सरयू नदी में स्नान कर ही भोग लगाते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर क्षेत्र के हंसेश्वर, तालेश्वर, केदारेश्वर और रामेश्वर मंदिर में मेला लगता है।
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इस वर्ष घुघुतिया का त्योहार एक दिन विलंब से हो रहा है। पंचागों में मकर संक्रांति का पर्व 15 मंगलवार बताया गया है। इसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में घुघुतिया पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सोमवार शाम को घुघुतिया पर्व पर बनने वाले, ढाल, तलवार, दाड़िम, उड़द की पूड़ी, खीर, सिंगल आदि पकवान बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर आज भी कोल्हू में गन्ने की पिराई कर उसके रस से पहाड़ी चावलों में खीर पकाई जाती है।
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अगले दिन सुबह बच्चे नहाकर और पूजा-अर्चना कर काले कव्वा काले, घुघती की माला खाले, आजा कव्वा आजा पूष की रोटी माघे खाजा के जयकारे से कव्वे का बुलाते हैं। जिस घर की छत पर रखे गए पकवानों को कव्वे खाते हैं उसे शुभ माना जाता है। दिलचस्प है कि इस दिन कव्वे भी दिखाई नहीं देते हैं।
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कहा जाता है कि कव्वे भी मकर संक्रांति के दिन सुबह बागेश्वर में सरयू नदी में स्नान कर ही भोग लगाते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर क्षेत्र के हंसेश्वर, तालेश्वर, केदारेश्वर और रामेश्वर मंदिर में मेला लगता है।