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महाकाली पर पैदल पुल बनाने का रास्ता साफ
Updated Fri, 30 Mar 2018 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़/धारचूला। नेपाल की मंजूरी के बाद महाकाली पर अस्थायी पैदल पुल बनाने का रास्ता साफ हो गया है। एक-दो दिन के भीतर पुल निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। 10 दिनों के भीतर पुल बनकर तैयार हो जाएगा। नेपाल से हरी झंडी मिलते ही प्रशासन ने सीमा पर पुल निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। अस्थायी पुल बनने से व्यास घाटी के सात गांवों के साथ ही नेपाल के दो गांव के लोगों को लाभ होगा। इसी मार्ग से होकर इन गांवों के लोग माइग्रेशन करेंगे। जरूरत पड़ने पर कैलास मानसरोवर यात्री भी इन पैदल पुलों से गुजरेंगे।
भारत में लखनपुर से नजंग के बीच भूस्खलन के चलते व्यास घाटी का संपर्क टूटा हुआ है। घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपल्चू, गुंजी, नाबी, रोंककांग, कुटी गांव महाकाली नदी के किनारे नेपाल सीमा से होकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में माइग्रेशन करते हैं। इसके साथ ही आपसी संबंध और आजीविका के सिलसिले में वह नेपाल जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
दूसरी ओर नेपाल-चीन सीमा के दो गांव छांगरू और तिंकर भी आवाजाही के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। भारत-चीन व्यापार भी इसी मार्ग पर निर्भर है। भारत और नेपाल के प्रभावित गांवों के लोग लंबे समय से नदी पर आवाजाही के लिए पैदल पुल बनाने की मांग अपनी-अपनी सरकार से कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को नाराज लोगों ने झूलापुल बंद करने के साथ ही चक्का जाम की चेतावनी दी थी।
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वहीं, भारत के अलावा नेपाल के लोगों का दबाव भी बढ़ता देख नेपाल ने लखनपुर और नजंग पर अस्थायी पुल निर्माण को मंजूरी दे दी है। दार्चुला विधायक गेल्वु बोरा ने इस मंजूरी की घोषणा की है। शुक्रवार को इस मामले में धारचूला एसडीएम आरके पांडेय ने पुुल निर्माण के लिए नेपाल सरकार की मंजूरी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एक-दो दिन के भीतर पुल निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
लोनिवि को पुल निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि पुल 10 दिन में बनकर तैयार हो जाएंगे। पुल के बनने से माइग्रेशन के दौरान समस्या से निजात मिलेगी। नेपाल और भारत के लोगों का आपसी संपर्क मजबूत होगा। वहीं, कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान लखनपुर और नजंग के बीच मार्ग न खुला तो यात्री इन्हीं पैदल पुलों से होकर गुजरेंगे।
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भारत में लखनपुर से नजंग के बीच भूस्खलन के चलते व्यास घाटी का संपर्क टूटा हुआ है। घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपल्चू, गुंजी, नाबी, रोंककांग, कुटी गांव महाकाली नदी के किनारे नेपाल सीमा से होकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में माइग्रेशन करते हैं। इसके साथ ही आपसी संबंध और आजीविका के सिलसिले में वह नेपाल जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
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दूसरी ओर नेपाल-चीन सीमा के दो गांव छांगरू और तिंकर भी आवाजाही के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। भारत-चीन व्यापार भी इसी मार्ग पर निर्भर है। भारत और नेपाल के प्रभावित गांवों के लोग लंबे समय से नदी पर आवाजाही के लिए पैदल पुल बनाने की मांग अपनी-अपनी सरकार से कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को नाराज लोगों ने झूलापुल बंद करने के साथ ही चक्का जाम की चेतावनी दी थी।
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वहीं, भारत के अलावा नेपाल के लोगों का दबाव भी बढ़ता देख नेपाल ने लखनपुर और नजंग पर अस्थायी पुल निर्माण को मंजूरी दे दी है। दार्चुला विधायक गेल्वु बोरा ने इस मंजूरी की घोषणा की है। शुक्रवार को इस मामले में धारचूला एसडीएम आरके पांडेय ने पुुल निर्माण के लिए नेपाल सरकार की मंजूरी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एक-दो दिन के भीतर पुल निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
लोनिवि को पुल निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि पुल 10 दिन में बनकर तैयार हो जाएंगे। पुल के बनने से माइग्रेशन के दौरान समस्या से निजात मिलेगी। नेपाल और भारत के लोगों का आपसी संपर्क मजबूत होगा। वहीं, कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान लखनपुर और नजंग के बीच मार्ग न खुला तो यात्री इन्हीं पैदल पुलों से होकर गुजरेंगे।