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बारावफात की छुट्टी के कारण निराश लौटीं महिलाएं
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:27 PM IST
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पिथौरागढ़। महिला अस्पताल में पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों का भी दबाव है। इसके चलते अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ लगी रहती है। अल्ट्रासाउंड और प्रसव कराने के लिए सैकड़ों की संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। बुधवार को बारावफात की छुट्टी के बावजूद दूरदराज से करीब दो दर्जन से अधिक महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंची। बाद में छुट्टी की जानकारी मिलने पर वह निराश होकर लौट गईं।
अस्पताल में मरीजों का काफी दबाव होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। पूर्व में जिला अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट आकर गर्भवती महिलाओं और मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते थे। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते वह अब महिला अस्पताल में नहीं आ पाते हैं। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेडियोलॉजिस्ट प्रत्येक बुधवार को यहां आते हैं। डेढ़ सौ से अधिक महिलाएं अल्ट्रासाउंड को पहुंचती हैं।
बलुवाकोट, बरम, थल आदि दूरदराज क्षेत्रों से महिलाएं बुधवार को भी अस्पताल पहुंचीं, लेकिन छुट्टी के चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेएस नबियाल ने बताया कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है, जबकि एनेस्थिसिया का पद काफी समय से रिक्त चल रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 120 से अधिक ओपीडी होती है, जबकि चार ऑपरेशन रोज होते हैं। सुविधाएं नहीं होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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अस्पताल में मरीजों का काफी दबाव होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। पूर्व में जिला अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट आकर गर्भवती महिलाओं और मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते थे। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते वह अब महिला अस्पताल में नहीं आ पाते हैं। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेडियोलॉजिस्ट प्रत्येक बुधवार को यहां आते हैं। डेढ़ सौ से अधिक महिलाएं अल्ट्रासाउंड को पहुंचती हैं।
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बलुवाकोट, बरम, थल आदि दूरदराज क्षेत्रों से महिलाएं बुधवार को भी अस्पताल पहुंचीं, लेकिन छुट्टी के चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेएस नबियाल ने बताया कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है, जबकि एनेस्थिसिया का पद काफी समय से रिक्त चल रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 120 से अधिक ओपीडी होती है, जबकि चार ऑपरेशन रोज होते हैं। सुविधाएं नहीं होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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