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भयावह बेरोजगारी का संकेत दे गई प्रादेशिक सेना की भर्ती
Updated Thu, 29 Nov 2018 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आयोजित प्रादेशिक सेना की भर्ती देश में भयावह बेरोजगारी का संकेत दे गई। महज 83 पदों के सापेक्ष करीब 15 हजार युवा हजारों किमी दूर से भूखे-प्यासे, लुटते हुए भर्ती मैदान तक पहुंचे। टैक्सी संचालकों, होटल, ढाबा स्वामियों ने इन युवाओं की गरीबी एवं मजबूरी का जमकर फायदा उठाया। भर्ती के अंतिम दिन देवभूमि से लौटते इन युवाओं के आंखों में आंसू और उनका रुधा गला उनकी बेबसी को बयां कर रहा था।
प्रादेशिक सेना की भर्ती में शामिल होने के लिए रविवार से ही युवा पिथौरागढ़ में उमड़ने लगे थे। देश के सात प्रांतों से युवा भर्ती का सपना संजोए यहां पहुंचे। इन युवाओं में अधिकतर के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ से पहुंचे युवाओं ने बताया कि खाने के लिए बमुश्किल ही हो पाता है। कोई कर्ज लेकर पहुंचा तो कोई अपने खाने के लिए सत्तू लेकर आया। दौड़ में ही पिछड़ जाने का मलाल भी उनमें था। बिहार लक्खीसेरा के रामरवि ने बताया कि हल्द्वानी से डेढ़ सौ रुपये टनकपुर तक और वहां से छह सौ रुपये खर्च कर यहां तक पहुंचे।
रात को एक मकान के बाहर सोए। सत्तू लाए थे, पानी के साथ उसी को पिया। आंखों में आंसू लिए गया के अमित प्रकाश ने बताया कि भर्ती के लिए दो दिन पहले पहुंचे। सड़क किनारे ही रात बिताई। छह-सात कट्टा जमीन पर ही परिवार निर्भर है। कैमूर के प्रमोद पासवान ने रोते हुए कहा कि उनके परिजनों को काफी उम्मीदें हैं। रिश्तेेदारों से कर्ज लेकर भर्ती में पहुंचा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
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मैनपुरी यूपी के शैलेष कुमार ने बताया कि उन्हें मैदान में तीन बार दौड़ाया गया, फिर बाहर कर दिया। उनमें व्यवस्था के प्रति भी काफी आक्रोश दिखा। कहा कि घर की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। परिजनों को उनसे काफी उम्मीदें हैं, लेकिन वह भर्ती में सफल होने से रह गए। इतनी मजबूरी झेलने के बाद भी इन युवाओं के हौसले टूटे नहीं है। उन्होंने बताया कि अब वह फैजाबाद में 11 दिसंबर से होने वाली भर्ती की तैयारी के लिए जीजान से जुटेंगे।
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प्रादेशिक सेना की भर्ती में शामिल होने के लिए रविवार से ही युवा पिथौरागढ़ में उमड़ने लगे थे। देश के सात प्रांतों से युवा भर्ती का सपना संजोए यहां पहुंचे। इन युवाओं में अधिकतर के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ से पहुंचे युवाओं ने बताया कि खाने के लिए बमुश्किल ही हो पाता है। कोई कर्ज लेकर पहुंचा तो कोई अपने खाने के लिए सत्तू लेकर आया। दौड़ में ही पिछड़ जाने का मलाल भी उनमें था। बिहार लक्खीसेरा के रामरवि ने बताया कि हल्द्वानी से डेढ़ सौ रुपये टनकपुर तक और वहां से छह सौ रुपये खर्च कर यहां तक पहुंचे।
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रात को एक मकान के बाहर सोए। सत्तू लाए थे, पानी के साथ उसी को पिया। आंखों में आंसू लिए गया के अमित प्रकाश ने बताया कि भर्ती के लिए दो दिन पहले पहुंचे। सड़क किनारे ही रात बिताई। छह-सात कट्टा जमीन पर ही परिवार निर्भर है। कैमूर के प्रमोद पासवान ने रोते हुए कहा कि उनके परिजनों को काफी उम्मीदें हैं। रिश्तेेदारों से कर्ज लेकर भर्ती में पहुंचा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
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मैनपुरी यूपी के शैलेष कुमार ने बताया कि उन्हें मैदान में तीन बार दौड़ाया गया, फिर बाहर कर दिया। उनमें व्यवस्था के प्रति भी काफी आक्रोश दिखा। कहा कि घर की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। परिजनों को उनसे काफी उम्मीदें हैं, लेकिन वह भर्ती में सफल होने से रह गए। इतनी मजबूरी झेलने के बाद भी इन युवाओं के हौसले टूटे नहीं है। उन्होंने बताया कि अब वह फैजाबाद में 11 दिसंबर से होने वाली भर्ती की तैयारी के लिए जीजान से जुटेंगे।