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नहीं सुलझा कीड़ाजड़ी को लेकर उपजा विवाद
Updated Wed, 02 May 2018 10:49 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। कीड़ाजड़ी को लेकर जिप्ती गांव में उपजा विवाद सुलझाना प्रशासन के लिए टेढ़ीखीर साबित हो रहा है। बुधवार को भी दोनों पक्षों में सुलह नहीं हो पाई।
मंगलवार को जिप्ती और पांगला के लोगों में कीड़ाजड़ी के विदोहन को लेकर विवाद हो गया था। जिप्ती के लोगों ने गर्बाधार में एकत्र होकर किसी को भी नजंगधार में कीड़ाजड़ी खोदने न जाने देने का एलान कर दिया था। मामला हाथापाई तक पहुंच गया था। जिप्ती की महिलाओं का आरोप था कि पांगला के लोगों ने उनसे मारपीट की। प्रधान की पत्नी कौशल्या देवी और इंद्रा देवी को घायल कर दिया। इसको लेकर जिप्ती की महिलाओं ने मंगलवार को धारचूला में धरना दिया था।
बुधवार को उपजिलाधिकारी आरके पांडेय ने दोनों पक्षों से वार्ता की। जिप्ती के लोगों का कहना था कि नजंगधार में किसी भी अन्य को जड़ी खोदने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। पांगला के लोगों का कहना था कि इससे लोगों का रोजगार छिन जाएगा। जनप्रतिनिधियों ने भी मध्यस्थता का प्रयास किया लेकिन सहमति नहीं बनी। वार्ता में जिप्ती के प्रधान देवी दत्त उपाध्याय, रूप सिंह दानू, ईश्वर सिंह, पांगला के प्रधान जनक बिष्ट, थानाध्यक्ष पीएस नेगी, उप निरीक्षक एनएस अधिकारी मौजूद थे। समाचार लिखे जाने तक समझौते के प्रयास जारी थे।
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मंगलवार को जिप्ती और पांगला के लोगों में कीड़ाजड़ी के विदोहन को लेकर विवाद हो गया था। जिप्ती के लोगों ने गर्बाधार में एकत्र होकर किसी को भी नजंगधार में कीड़ाजड़ी खोदने न जाने देने का एलान कर दिया था। मामला हाथापाई तक पहुंच गया था। जिप्ती की महिलाओं का आरोप था कि पांगला के लोगों ने उनसे मारपीट की। प्रधान की पत्नी कौशल्या देवी और इंद्रा देवी को घायल कर दिया। इसको लेकर जिप्ती की महिलाओं ने मंगलवार को धारचूला में धरना दिया था।
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बुधवार को उपजिलाधिकारी आरके पांडेय ने दोनों पक्षों से वार्ता की। जिप्ती के लोगों का कहना था कि नजंगधार में किसी भी अन्य को जड़ी खोदने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। पांगला के लोगों का कहना था कि इससे लोगों का रोजगार छिन जाएगा। जनप्रतिनिधियों ने भी मध्यस्थता का प्रयास किया लेकिन सहमति नहीं बनी। वार्ता में जिप्ती के प्रधान देवी दत्त उपाध्याय, रूप सिंह दानू, ईश्वर सिंह, पांगला के प्रधान जनक बिष्ट, थानाध्यक्ष पीएस नेगी, उप निरीक्षक एनएस अधिकारी मौजूद थे। समाचार लिखे जाने तक समझौते के प्रयास जारी थे।
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