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नेपाल में देरी से पहुंच रहे बीमे के चेक
Updated Wed, 11 Apr 2018 10:52 PM IST
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बैतड़ी/झूलाघाट(पिथौरागढ़)। नेपाली नागरिक भारतीय बीमा कंपनियों से परेशान हैं। इन लोगों का एलआईसी भुगतान की रकम चेक से भेजी जा रही है, जो देरी से पहुंचने के कारण कैंसल हो जा रहा है। इस कारण नेपाली नागरिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल के प्रदेश नंबर 7 के बैतड़ी, दार्चुला और कंचनपुर जिले की सीमाएं भारत से लगी हैं। इन जिलों के लोग दैनिक उपभोग की वस्तुएं, दवाइयां और इलाज के लिए भारतीय बाजार पर निर्भर है। इन जिलों के अधिकतर लोग रोजगार के लिए सीमावर्ती भारतीय बाजार में आते रहते हैं। इन लोगों ने भारतीय जीवन बीमा कंपनी से बीमा भी करवा रखा है। कई एजेंटों ने खुद की जिम्मेदारी में खाते खुलवा रखे हैं। कुछ एजेंटों ने पांच वर्ष में ब्याज और अंत में दोगुना पैसा मिलने की बात कहकर भी बीमा कर रखे हैं।
इन खातों में अब रिफंड और मैच्योरिटी का पैसा आने लगा हैं। पहले यह धनराशि नकद मिल जाती थी, लेकिन भारत सरकार के आधार लागू करने के बाद अब यह धनराशि चेक से मिलने लगी है। बीमा कंपनियां इन चेकों को डाकघर के जरिए भेज रही है। चेक को यहां पहुंचने में एक माह का समय लग रहा है। यहां पहुंचने केे बाद ये चेक क्लीयरेंस के लिए वापस भारत जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तीन माह का समय लग रहा है। तब तक चेक की वैधता समाप्त हो जा रही है। बैतड़ी के बीमा निवेशक जीवन मंगोल का कहना है कि बीमा कंपनी द्वारा पोस्टल विभाग से चेक भेजे जा रहे हैं, जो समयावधि खत्म होने के बाद नेपाली नागरिकों तक पहुंच रहे हैं। इस कारण बैंक इन चेकों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
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नेपाली नागरिकों के चेक डाक विभाग के जरिए नेपाल भेजे जा रहे है। क्लीयरेंस के लिए ये चेक दोबारा से भारतीय बैंकों में आ रहे हैं, जिससे देरी हो हो रही है। निरस्त चेकों को दोबारा से बनवाने के लिए पुणे मुख्यालय से इजाजत मांगी गई है। अनुमति मिलते ही ऐसे चेक दोबारा से बनाए जाएंगे। -जीएस धानिक, शाखा प्रबंधक, भारतीय जीवन बीमा निगम पिथौरागढ़
नेपाल के बैतड़ी जिले में पहले चेक झूलाघाट के रास्ते नेपाल भेजे जा रहे थे। अंतरराष्ट्रीय मामला होने की वजह से इस समय डाक मुरादाबाद, दिल्ली होते हुए जा रही है। अमूमन डाक 3-4 दिन में पहुंच जानी चाहिए। डाक लेट हो रही है तो नेपाल से हो रही होगी, हमारे यहां से समय पर डाक नेपाल पहुंच रही है। -हीरा सिंह दानू, पोस्टमास्टर, पिथौरागढ़
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नेपाल के प्रदेश नंबर 7 के बैतड़ी, दार्चुला और कंचनपुर जिले की सीमाएं भारत से लगी हैं। इन जिलों के लोग दैनिक उपभोग की वस्तुएं, दवाइयां और इलाज के लिए भारतीय बाजार पर निर्भर है। इन जिलों के अधिकतर लोग रोजगार के लिए सीमावर्ती भारतीय बाजार में आते रहते हैं। इन लोगों ने भारतीय जीवन बीमा कंपनी से बीमा भी करवा रखा है। कई एजेंटों ने खुद की जिम्मेदारी में खाते खुलवा रखे हैं। कुछ एजेंटों ने पांच वर्ष में ब्याज और अंत में दोगुना पैसा मिलने की बात कहकर भी बीमा कर रखे हैं।
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इन खातों में अब रिफंड और मैच्योरिटी का पैसा आने लगा हैं। पहले यह धनराशि नकद मिल जाती थी, लेकिन भारत सरकार के आधार लागू करने के बाद अब यह धनराशि चेक से मिलने लगी है। बीमा कंपनियां इन चेकों को डाकघर के जरिए भेज रही है। चेक को यहां पहुंचने में एक माह का समय लग रहा है। यहां पहुंचने केे बाद ये चेक क्लीयरेंस के लिए वापस भारत जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तीन माह का समय लग रहा है। तब तक चेक की वैधता समाप्त हो जा रही है। बैतड़ी के बीमा निवेशक जीवन मंगोल का कहना है कि बीमा कंपनी द्वारा पोस्टल विभाग से चेक भेजे जा रहे हैं, जो समयावधि खत्म होने के बाद नेपाली नागरिकों तक पहुंच रहे हैं। इस कारण बैंक इन चेकों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
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नेपाली नागरिकों के चेक डाक विभाग के जरिए नेपाल भेजे जा रहे है। क्लीयरेंस के लिए ये चेक दोबारा से भारतीय बैंकों में आ रहे हैं, जिससे देरी हो हो रही है। निरस्त चेकों को दोबारा से बनवाने के लिए पुणे मुख्यालय से इजाजत मांगी गई है। अनुमति मिलते ही ऐसे चेक दोबारा से बनाए जाएंगे। -जीएस धानिक, शाखा प्रबंधक, भारतीय जीवन बीमा निगम पिथौरागढ़
नेपाल के बैतड़ी जिले में पहले चेक झूलाघाट के रास्ते नेपाल भेजे जा रहे थे। अंतरराष्ट्रीय मामला होने की वजह से इस समय डाक मुरादाबाद, दिल्ली होते हुए जा रही है। अमूमन डाक 3-4 दिन में पहुंच जानी चाहिए। डाक लेट हो रही है तो नेपाल से हो रही होगी, हमारे यहां से समय पर डाक नेपाल पहुंच रही है। -हीरा सिंह दानू, पोस्टमास्टर, पिथौरागढ़