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झूमने लगे फिर फलास के फूल...
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:01 PM IST
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पिथौरागढ़ में वसंत पंचमी के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। डॉ. तारा सिंह की अध्यक्षता, युवा कवि ललित शौर्य के संचालन में हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
युवा कवयित्री आशा सौन ने झूमने लगे फिर पलास के फूल, फिर आड़ूू, घिंघारु बौराए, कवयित्री जयमाला देवलाल चली श्रंगार करने धरा, हटा शीत की चादर को, कवयित्री डॉ. आनंदी जोशी ने वृक्षों में नव पल्लव फूटे, हार गया पतझड़ हरजाई, देखो ऋतु वसंत की आई रचना सुनाई। शिक्षक मोहन चंद्र पाठक ने अबकी बार यह वसंत, विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भर दे, लक्ष्मी आर्य ने ऋतुओं का नाम लेकर मानव एक-दूजे को छलता है, मथुरा दत्त चौंसाली ने वसंत पंचमी की सबको बधाई, साहित्यकारों की होली आई रचना प्रस्तुत कर दी। कवि ललित भट्ट ने कहा वसंत आया कहां है, हमने इसे बुलाया कविता प्रस्तुत की। मुन्नी टम्टा ने पेड़ हैं सांसें, पेड़ है जीवन, पेड़ों की रखवाली हो, चारों ओर हरियाली हो, कवि ललित शौर्य ने लो वसंत आ गया, हृदय-हृदय छा गया, उमंग भी जवान है, तरंग भी जवान है, मन सभी के भा गया, लो वसंत आ गया, नीरज भट्ट ने कहीं कतरे-कतरे को तरसता है आदमी, कहीं नाजों से पलता है आदमी रचना सुनाई। कवि सम्मेलन में कैलाश चंद्र, पूरन सिंह, गोवर्धन, कमल, विक्की मेहता, भूपेश बिष्ट, नीरज धामी, आशा मोहन, तनुजा उप्रेती आदि मौजूद थे।
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युवा कवयित्री आशा सौन ने झूमने लगे फिर पलास के फूल, फिर आड़ूू, घिंघारु बौराए, कवयित्री जयमाला देवलाल चली श्रंगार करने धरा, हटा शीत की चादर को, कवयित्री डॉ. आनंदी जोशी ने वृक्षों में नव पल्लव फूटे, हार गया पतझड़ हरजाई, देखो ऋतु वसंत की आई रचना सुनाई। शिक्षक मोहन चंद्र पाठक ने अबकी बार यह वसंत, विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भर दे, लक्ष्मी आर्य ने ऋतुओं का नाम लेकर मानव एक-दूजे को छलता है, मथुरा दत्त चौंसाली ने वसंत पंचमी की सबको बधाई, साहित्यकारों की होली आई रचना प्रस्तुत कर दी। कवि ललित भट्ट ने कहा वसंत आया कहां है, हमने इसे बुलाया कविता प्रस्तुत की। मुन्नी टम्टा ने पेड़ हैं सांसें, पेड़ है जीवन, पेड़ों की रखवाली हो, चारों ओर हरियाली हो, कवि ललित शौर्य ने लो वसंत आ गया, हृदय-हृदय छा गया, उमंग भी जवान है, तरंग भी जवान है, मन सभी के भा गया, लो वसंत आ गया, नीरज भट्ट ने कहीं कतरे-कतरे को तरसता है आदमी, कहीं नाजों से पलता है आदमी रचना सुनाई। कवि सम्मेलन में कैलाश चंद्र, पूरन सिंह, गोवर्धन, कमल, विक्की मेहता, भूपेश बिष्ट, नीरज धामी, आशा मोहन, तनुजा उप्रेती आदि मौजूद थे।
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