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छात्र-छात्राओं को बताया पुरातात्विक धरोहरों का महत्व
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पिथौरागढ़। संस्कृति विभाग उत्तराखंड के तहत क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को पुरातात्विक धरोहरों का महत्व बताया गया। इस अवसर पर कुमाऊं की प्राचीन धरोहर मंदिर, मूर्ति, धारे, नौले, किले, अभिलेख आदि को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षण एवं संवर्द्धन को लेकर स्लाइड शो के माध्यम से जानकारी दी गई। कार्यशाला का उद्घाटन क्षेत्रीय पुरातत्व प्रभारी डा.चंद्र सिंह चौहान और महाविद्यालय के प्राचार्य डा.डीएस पांगती ने किया।
डा.चौहान ने कहा कि बिखरी धरोहरों को सहेजकर उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से आए प्रो.बीडीएस नेगी ने बतौर मुख्य वक्ता स्लाइड शो के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ ही ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की जानकारी दी। प्राचार्य डॉ.पांगती ने इतिहास के महत्व और उपयोगिता से अवगत कराया। इतिहास के विभाग प्रभारी डा.बीएम पांडेय ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने को लेकर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डा.प्रेमलता पंत, डा.सरोज वर्मा, डा.हेम चंद्र पांडेय, डा.मुन्नी पाठक, डा.आरडी जोशी, डा.पीएस बिष्ट, डा.जीसी पंत आदि मौजूद थे। छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनी में रखी गई प्राचीन मंदिरों की तस्वीरों और शिलालेखों का अवलोकन भी किया।
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भक्त दर्शन
डा.चौहान ने कहा कि बिखरी धरोहरों को सहेजकर उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से आए प्रो.बीडीएस नेगी ने बतौर मुख्य वक्ता स्लाइड शो के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ ही ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की जानकारी दी। प्राचार्य डॉ.पांगती ने इतिहास के महत्व और उपयोगिता से अवगत कराया। इतिहास के विभाग प्रभारी डा.बीएम पांडेय ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने को लेकर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डा.प्रेमलता पंत, डा.सरोज वर्मा, डा.हेम चंद्र पांडेय, डा.मुन्नी पाठक, डा.आरडी जोशी, डा.पीएस बिष्ट, डा.जीसी पंत आदि मौजूद थे। छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनी में रखी गई प्राचीन मंदिरों की तस्वीरों और शिलालेखों का अवलोकन भी किया।
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