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टैक्सी चालकों ने सरकार का पुतला फूंका
Updated Sat, 27 Jan 2018 10:50 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर चल रही कवायद से हर वर्ग के लोग परेशान हैं। टैक्सी चालकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। उन्हाेंने सरकार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए पुतला दहन किया।
महाकाली की आवाज संगठन के बैनर चले एकत्र टैक्सी चालकों ने कहा कि सरकार लोगों की आजीविका के लिए क्या व्यवस्था करेगी। अब तक यह कहीं पर भी उल्लेख नहीं है कि छोटा-मोटा काम करने वालों का भविष्य क्या होगा। झूलाघाट पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा है और सड़क का बड़ा हिस्सा बांध में समा जाएगा।
महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि बांध को लेकर हर वर्ग की चिंता सामने आने लगी है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सरकार ने पुनर्वास और रोजगार के लिए कोई खाका तैयार नहीं किया है। सैकड़ों परिवारों की आजीविका टैक्सी संचालन से होती है। यदि बांध बना तो उनका रोजगार छिन जाएगा। टैक्सी यूनियन के जगदीश चंद ने कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर वाहन खरीदे हैं।
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अब तक कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई है। बांध बनने पर सभी बेरोजगार हो जाएंगे। टैक्सी चालकों ने फैसला लिया है कि बांध के खिलाफ चलाए जाने वाली हर मुहिम में साथ देंगे और सरकार को बांध निर्माण का फैसला वापस लेने के लिए विवश करेंगे। पुतला दहन के समय नरेंद्र सिंह, बबलू थापा, अनिल चंद, शेखर कलखुड़िया, दिनेश कुमार, हरीश, गणेश चंद, जनक आदि थे।
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महाकाली की आवाज संगठन के बैनर चले एकत्र टैक्सी चालकों ने कहा कि सरकार लोगों की आजीविका के लिए क्या व्यवस्था करेगी। अब तक यह कहीं पर भी उल्लेख नहीं है कि छोटा-मोटा काम करने वालों का भविष्य क्या होगा। झूलाघाट पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा है और सड़क का बड़ा हिस्सा बांध में समा जाएगा।
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महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि बांध को लेकर हर वर्ग की चिंता सामने आने लगी है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सरकार ने पुनर्वास और रोजगार के लिए कोई खाका तैयार नहीं किया है। सैकड़ों परिवारों की आजीविका टैक्सी संचालन से होती है। यदि बांध बना तो उनका रोजगार छिन जाएगा। टैक्सी यूनियन के जगदीश चंद ने कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर वाहन खरीदे हैं।
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अब तक कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई है। बांध बनने पर सभी बेरोजगार हो जाएंगे। टैक्सी चालकों ने फैसला लिया है कि बांध के खिलाफ चलाए जाने वाली हर मुहिम में साथ देंगे और सरकार को बांध निर्माण का फैसला वापस लेने के लिए विवश करेंगे। पुतला दहन के समय नरेंद्र सिंह, बबलू थापा, अनिल चंद, शेखर कलखुड़िया, दिनेश कुमार, हरीश, गणेश चंद, जनक आदि थे।