{"_id":"59f76cca4f1c1b8e698b8614","slug":"131509387466-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज लौट आएंगे तिब्बत की मंडी से भारतीय व्यापारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज लौट आएंगे तिब्बत की मंडी से भारतीय व्यापारी
Updated Mon, 30 Oct 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पिथौरागढ़। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार 2017 का मंगलवार को समापन हो जाएगा। तिब्बत की मंडी तकलाकोट गए सभी भारतीय व्यापारी वापस लौट आएंगे। अब व्यापार अगले साल जून में फिर से खुलेगा। तिब्बत की मंडी में इस समय 42 व्यापारी और 35 सहायक मौजूद हैं। इन सभी ने वापस लौटने की तैयारी कर दी है। व्यापारी अपने सामान को घोड़ों और खच्चरों के माध्यम से गुंजी तक पहुंचाएंगे।
धारचूला के उपजिलाधिकारी आरके पांडे ने बताया कि 31 अक्तूबर के बाद किसी भी व्यापारी को तिब्बत में रहने की अनुमति नहीं होगी। क्योंकि प्रशासन ने हर व्यापारी को सिर्फ 31 अक्तूबर तक का ही परमिट जारी किया है। 1992 में भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य होने के बाद लिपुलेख दर्रे से स्थल व्यापार को फिर से शुरू करने की सहमति बनी थी। सीमित अवधि के लिए संचालित होने वाले इस व्यापार में भारतीय व्यापारियों को विदेश मंत्रालय से परमिट जारी किए जाते हैं। व्यापार की प्रक्रिया को संचालित करने के लिए धारचूला में ट्रेड अधिकारी को नामित किया जाता है। यह जिम्मेदारी 1992 से उपजिलाधिकारी निभा रहे हैं।
तहसील प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार इस बार तिब्बत व्यापार के लिए 78 व्यापारियों और 87 सहायकों को परमिट जारी किए गए। इनमें से सभी व्यापारी और सहायक एक एक बार तिब्बत की मंडी तकलाकोट तक जा चुके हैं। इस बार जून में परमिट जारी हो गए थे और प्रशासन ने व्यापारियों की मांग पर एक साथ 31 अक्तूबर तक के लिए परमिट जारी कर दिया गया था। पिछले वर्ष तक प्रशासन 30 सितंबर तक के लिए परमिट देता था। बाद में जिलाधिकारी की विशेष अनुमति पर 15-15 दिन के लिए व्यापार की अवधि बढ़ाई जाती थी। इस बार इस तरह के झंझट से व्यापारियों को मुक्ति मिल गई।
विज्ञापन
एक हफ्ते में मिलेंगे पूरे आंकड़े
पिथौरागढ़। धारचूला तहसील कार्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल का कहना है कि व्यापार के आयात-निर्यात के पूरे आंकड़े एकत्र करने में अभी कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा। उन्होंने बताया कि 30 अक्तूबर तक 81 लाख 55 हजार रुपये मूल्य का सामान निर्यात हुआ और पांच करोड़ 94 लाख रुपये मूल्य का सामान आयात हुआ। भारतीय व्यापारी तिब्बत की मंडी से ऊनी कपड़े, जूते, जैकेट, खिलौने जैसी सामग्री लेकर आएंगे जबकि भारत से तकलाकोट को चाय, मिश्री, गुड़, कॉफी, स्टील के बर्तनों का निर्यात किया गया।
लिपुलेख की बर्फ से होगी कठिनाई
पिथौरागढ़। लिपुलेख दर्रे में दो दिन पूर्व बर्फ गिर जाने के कारण व्यापारियों को आने में कठिनाई हो सकती है। व्यापारी लिपुलेख दर्रा पारकर ही तिब्बत में प्रवेश करते हैं और वापसी में भी इसी दर्रे को पार करना पड़ता है। यदि लिपुलेख में ज्यादा मात्रा में बर्फ होगी तो घोड़े और खच्चरों को लाने में कठिनाई हो जाएगी। व्यापारियों ने इस आशंका को देखते हुए ज्यादा सामान पहले ही गुंजी तक पहुंचा दिया है।
धारचूला के उपजिलाधिकारी आरके पांडे ने बताया कि 31 अक्तूबर के बाद किसी भी व्यापारी को तिब्बत में रहने की अनुमति नहीं होगी। क्योंकि प्रशासन ने हर व्यापारी को सिर्फ 31 अक्तूबर तक का ही परमिट जारी किया है। 1992 में भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य होने के बाद लिपुलेख दर्रे से स्थल व्यापार को फिर से शुरू करने की सहमति बनी थी। सीमित अवधि के लिए संचालित होने वाले इस व्यापार में भारतीय व्यापारियों को विदेश मंत्रालय से परमिट जारी किए जाते हैं। व्यापार की प्रक्रिया को संचालित करने के लिए धारचूला में ट्रेड अधिकारी को नामित किया जाता है। यह जिम्मेदारी 1992 से उपजिलाधिकारी निभा रहे हैं।
विज्ञापन
तहसील प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार इस बार तिब्बत व्यापार के लिए 78 व्यापारियों और 87 सहायकों को परमिट जारी किए गए। इनमें से सभी व्यापारी और सहायक एक एक बार तिब्बत की मंडी तकलाकोट तक जा चुके हैं। इस बार जून में परमिट जारी हो गए थे और प्रशासन ने व्यापारियों की मांग पर एक साथ 31 अक्तूबर तक के लिए परमिट जारी कर दिया गया था। पिछले वर्ष तक प्रशासन 30 सितंबर तक के लिए परमिट देता था। बाद में जिलाधिकारी की विशेष अनुमति पर 15-15 दिन के लिए व्यापार की अवधि बढ़ाई जाती थी। इस बार इस तरह के झंझट से व्यापारियों को मुक्ति मिल गई।
विज्ञापन
एक हफ्ते में मिलेंगे पूरे आंकड़े
पिथौरागढ़। धारचूला तहसील कार्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल का कहना है कि व्यापार के आयात-निर्यात के पूरे आंकड़े एकत्र करने में अभी कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा। उन्होंने बताया कि 30 अक्तूबर तक 81 लाख 55 हजार रुपये मूल्य का सामान निर्यात हुआ और पांच करोड़ 94 लाख रुपये मूल्य का सामान आयात हुआ। भारतीय व्यापारी तिब्बत की मंडी से ऊनी कपड़े, जूते, जैकेट, खिलौने जैसी सामग्री लेकर आएंगे जबकि भारत से तकलाकोट को चाय, मिश्री, गुड़, कॉफी, स्टील के बर्तनों का निर्यात किया गया।
लिपुलेख की बर्फ से होगी कठिनाई
पिथौरागढ़। लिपुलेख दर्रे में दो दिन पूर्व बर्फ गिर जाने के कारण व्यापारियों को आने में कठिनाई हो सकती है। व्यापारी लिपुलेख दर्रा पारकर ही तिब्बत में प्रवेश करते हैं और वापसी में भी इसी दर्रे को पार करना पड़ता है। यदि लिपुलेख में ज्यादा मात्रा में बर्फ होगी तो घोड़े और खच्चरों को लाने में कठिनाई हो जाएगी। व्यापारियों ने इस आशंका को देखते हुए ज्यादा सामान पहले ही गुंजी तक पहुंचा दिया है।