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बांध बना तो त्रिपुरासुंदरी नहीं जा पाएंगे भारतीय
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:48 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पंचेश्वर बांध बनने पर भारत एवं नेपाल की साझा संस्कृति के प्रतीक बैतड़ी के त्रिपुरासुंदरी मंदिर तक भारतीय नहीं जा पाएंगे। शनिवार को त्रिपुरासुंदरी मेले से लौट रहे लोगों को महाकाली की आवाज संगठन ने पर्चे वितरित किए। पर्चे में कहा गया है कि बांध बनने पर सांस्कृतिक और धार्मिक आस्थाएं समाप्त हो जाएंगी।
महाकाली की आवाज संगठन ने मेले के दौरान ही बांध के विरोध में बेहतरीन मौका ढूंढ लिया। सैकड़ों लोगों तक यह पर्चे पहुंचाए गए। पर्चे में कहा गया है कि बांध बनने पर चाहते हुए भी भारतीय त्रिपुरासुंदरी मंदिर के दर्शन नहीं कर पाएंगे। पर्चे में लिखा है कि दोनों देशों के लोग त्रिपुरासुंदरी को रणसैनी के रूप में पूजते हैं। साथ ही यह काली नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों का असाध्य शक्ति का पीठ भी है। यहां के लोग इसे कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
पर्चे में यह भी बताया गया है कि पंचेश्वर बांध के बनने से दर्जनों गांव डूब जाएंगे। सरकार अगर इनको विस्थापित भी करती है तो न जाने उनको कहां बसाया जाएगा। कहा गया कि बांध लोगों को उनकी संस्कृति और आस्था के केंद्रों से दूर कर देगा। पर्चे बांटने वालों में महाकाली की आवाज संगठन संयोजक शंकर खड़ायत, भोला दत्त जोशी, भैरव पंगरिया, मदन ओली, मोहन चंद, रवीश कलखुड़िया आदि लोग मौजूद थे।
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महाकाली की आवाज संगठन ने मेले के दौरान ही बांध के विरोध में बेहतरीन मौका ढूंढ लिया। सैकड़ों लोगों तक यह पर्चे पहुंचाए गए। पर्चे में कहा गया है कि बांध बनने पर चाहते हुए भी भारतीय त्रिपुरासुंदरी मंदिर के दर्शन नहीं कर पाएंगे। पर्चे में लिखा है कि दोनों देशों के लोग त्रिपुरासुंदरी को रणसैनी के रूप में पूजते हैं। साथ ही यह काली नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों का असाध्य शक्ति का पीठ भी है। यहां के लोग इसे कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
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पर्चे में यह भी बताया गया है कि पंचेश्वर बांध के बनने से दर्जनों गांव डूब जाएंगे। सरकार अगर इनको विस्थापित भी करती है तो न जाने उनको कहां बसाया जाएगा। कहा गया कि बांध लोगों को उनकी संस्कृति और आस्था के केंद्रों से दूर कर देगा। पर्चे बांटने वालों में महाकाली की आवाज संगठन संयोजक शंकर खड़ायत, भोला दत्त जोशी, भैरव पंगरिया, मदन ओली, मोहन चंद, रवीश कलखुड़िया आदि लोग मौजूद थे।
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