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माइग्रेशन गांवों में भालू तोड़ने लगे मकानों की छत
Updated Sat, 03 Nov 2018 10:58 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। लोगों के लौटने के साथ ही मल्ला जोहार के माइग्रेशन गांवों में भालुओं ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। भालू मकानों की छतों को तोड़कर खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के माइग्रेशन गांव गनघर, मिलम, मर्तोली, बिलजु, ल्वां, मापा, खिलाच, टोला, रिलकोट, रालम आदि के लोग अक्तूबर में शीतकालीन प्रवास पर तलहटी की ओर लौट जाते हैं। क्योंकि माइग्रेशन वाले गांवों में अक्तूबर से बर्फबारी शुरू हो जाती है।
लोगों के तलहटी की ओर निकलते ही भालू हर साल उनके मकानों की छतों को तोड़कर खाद्य सामग्री खा जाते हैं। मकानों में तोड़फोड़ भी करते हैं। मल्ला जोहार से लौटे ईश्वर नबियाल ने बताया कि गनघर सहित कई गांवों में भालुओं ने घरों को नुकसान पहुंचाया है। मकानों की छतें तोड़ दी गई हैं।
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उन्होंने कहा कि लोगों के तलहटी की ओर आने के बाद लगभग हर वर्ष भालुओं द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। यह लोग मकानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग वर्षों से प्रशासन से कर रहे हैं, लेकिन सरकारी अमला मकानों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं कर पा रहा है। इससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र के माइग्रेशन गांव गनघर, मिलम, मर्तोली, बिलजु, ल्वां, मापा, खिलाच, टोला, रिलकोट, रालम आदि के लोग अक्तूबर में शीतकालीन प्रवास पर तलहटी की ओर लौट जाते हैं। क्योंकि माइग्रेशन वाले गांवों में अक्तूबर से बर्फबारी शुरू हो जाती है।
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लोगों के तलहटी की ओर निकलते ही भालू हर साल उनके मकानों की छतों को तोड़कर खाद्य सामग्री खा जाते हैं। मकानों में तोड़फोड़ भी करते हैं। मल्ला जोहार से लौटे ईश्वर नबियाल ने बताया कि गनघर सहित कई गांवों में भालुओं ने घरों को नुकसान पहुंचाया है। मकानों की छतें तोड़ दी गई हैं।
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उन्होंने कहा कि लोगों के तलहटी की ओर आने के बाद लगभग हर वर्ष भालुओं द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। यह लोग मकानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग वर्षों से प्रशासन से कर रहे हैं, लेकिन सरकारी अमला मकानों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं कर पा रहा है। इससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।