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पिथौरागढ़: हवा में लटकी उम्मीदों की ट्राॅली, पहाड़ पार करना बनी मजबूरी; छह गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही ठप

Thu, 03 Sep 2026 12:57 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Thu, 03 Sep 2026 12:57 PM IST
सार

पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी तहसील के छह गांवों की तीन हजार से अधिक आबादी की आवाजाही का एकमात्र साधन मंदाकिनी नदी पर लगी ट्रॉली खराब हो गई है। साथ ही ट्रॉली के आगे का पैदल रास्ता भी भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। 

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The trolley on the Mandakini river broke down
ट्राली खराब होने से इस तरह जान जोखिम में डालकर पहाड़ पर चढ़ रहे हैं छह गांवों के ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी तहसील के छह गांवों की उम्मीद की ट्राॅली हवा में लटक गई है और उनके सामने खतरों का पहाड़ पार करने की मजबूरी है। इन गांवों की तीन हजार से अधिक की आबादी की आवाजाही का एकमात्र जरिया मंदाकनी नदी पर लगी ट्राॅली खराब हो गई है। ट्राॅली के आगे का पैदल रास्ता भी भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी के ऊपर दरकते पहाड़ पर चढ़कर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।

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मंदाकनी नदी में रतगड़ी के पास लगी ट्राॅली से ही गैला, पत्थरकोट, तोमिक, राप्ती, साना, रिंगू और चुलकोट के ग्रामीण इलाज, सामान आदि जरूरी कामों के लिए गांव से बाहर निकलते हैं। आए दिन यह ट्राॅली खराब होकर काम करना बंद कर रही है। बीते दिनों फिर से ट्राॅली खराब होकर शोपीस बनकर रह गई है। ट्राॅली तक पहुंचने का संपर्क मार्ग भी बीते दिन हुई बारिश से ध्वस्त हो गया। ऐसे में इन गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों के साथ ही बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि ग्रामीण मंदाकनी नदी के किनारे पहाड़ पर चढ़कर खतरे के बीच आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। आपदा की स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों की परेशानी को अनदेखा कर सिस्टम ट्राॅली की मरम्मत के लिए बजट का रोना रो रहा है।

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15 से 20 किलोमीटर का फेरा लगा रहे हैं ग्रामीण
छह गांवों के युवा तो किसी तरह खतरे के बीच पहाड़ चढ़कर आवाजाही कर रहे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं है। ऐसे में यदि किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाना हो तो ग्रामीण सुरक्षित आवाजाही के लिए वल्थी, गैला होते हुए 15 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त पैदल फेरा लगाकर मदकोट बाजार पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में कई बार प्रशासन से इस ट्राॅली की ठीक से मरम्मत करने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

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बोले लोग

रतगड़ी में ट्राॅली की मरम्मत के लिए पूर्व में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की गई। अब तक ट्राॅली की मरम्मत नहीं हुई। अब ट्राॅली पूरी तरह खराब होकर हवा में लटक गई है इससे छह गांवों के ग्रामीणों की दिक्कत बढ़ गई है। जल्द ट्राॅली की मरम्मत नहीं हुई तो आंदोलन होगा। -भावना दानू, जिला पंचायत सदस्य


ट्राॅली खराब होने से ग्रामीण खतरे के बीच आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। प्रशासन भी इसका इंतजार कर रहा है। यही कारण है कि ट्राॅली की अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। अब मजबूरन ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन करना पड़ेगा। -गणेश सिंह, प्रधान, रिंगू

 

पिछले वर्ष ग्राम सभा के विशेष आग्रह पर लोनिवि ने ट्राॅली ठीक की थी। इस बार भी ट्राॅली खराब हो गई है। इसके सुधारीकरण के लिए एस्टीमेट भेजा गया है। जिलाधिकारी ने भी इसे ठीक करने का आश्वासन दिया है। उम्मीद है इस बार जल्द धनराशि मिलेगी और ट्रॉली ठीक होगी। -अजय थपलियाल, ईई, लोनिवि, डीडीहाट

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