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साहित्यकारों ने गढ़वाली भाषा को विद्यालयों के पाठ्क्रम में शामिल करने की उठाई मांग

Mon, 29 Jul 2019 07:15 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2019 07:15 PM IST
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The writers demanded inclusion of Garhwali language in the curriculum of schools
साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था जाह्नवी सहित देवप्रयाग चंद्रबदनी कला एवं सांस्कृतिक समिति व लोक साहित्यकारों ने गढ़वाली भाषा को प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के पाठ्यक्रम में जोड़े जाने की मांग की है। कहा कि गढ़वाली भाषा टिहरी रियासत की राजभाषा रही है, जिसमें कि साहित्य का बहुत बड़ा भंडार है।
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जाह्नवी संस्था अध्यक्ष व जन कवि डा. भगवती प्रसाद मिश्र, शैलेश मटियानी पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार व शिक्षाविद डा. सुरेंद्रदत्त सेमल्टी, कथाकार सुरेंद्र भट्ट, कवि अनसूया प्रसाद भट्ट, अनुज, लेखक वीरेंद्र बर्त्वाल, विनोद भट्ट, पत्रकार डा. प्रभाकर जोशी, राजेश भट्ट व गिरीशचंद्र भट्ट ने टिहरी जिले में प्राथमिक स्तर से गढ़वाली भाषा को पढ़ाए जाने की मांग की है। कहा गढ़वाली भाषा के साहित्यकारों की रचनाओं को छठवीं से बारहवीं तक पढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में गढ़वाली भाषा की पत्र पत्रिकाओं को उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जब सभी राज्यों में स्थानीय भाषा के पठन पाठन की व्यवस्था है, तो उत्तराखंड में भी में इसे लागू किया जाना चाहिए। तभी आनेवाली पीढ़ियां अपनी बोली भाषा से परिचित होंगे। साहित्यकारों व पत्रकारों ने कहा कि इस संबंध में शीघ्र ही जिलाधिकारी टिहरी से मुलाकात की जाएगी। साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया जाएगा।
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