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एनआईटी उत्तराखंड के कुलसचिव मूल संस्थान लौटे
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एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के कुलसचिव डॉ. पीएम काला अपने मूल संस्थान साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद (यूपी) लौट गए हैं। डॉ. काला पांच साल की प्रतिनियुक्ति पर एनआईटी में कुलसचिव के पद पर आए थे, लेकिन डेढ़ साल में ही मूल संस्थान ने उन्हें वापस बुला लिया।
साहू जैन कॉलेज के नजीबाबाद में भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीएम काला की 4 नवंबर 2020 को एनआईटी उत्तराखंड में कुलसचिव पद पर नियुक्ति हुई थी। 13 नवंबर को उन्होंने एनआईटी में पदभार ग्रहण किया था। वह पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए थे, लेकिन बृहस्पतिवार को वह कुलसचिव पद से कार्यमुुक्त होकर अपने मूल संस्थान मेें लौट गए। अभी उनका साढ़े तीन साल का कार्यकाल शेष था।
डॉ. काला ने बताया कि उनके मूल संस्थान साहू जैन कॉलेज में इस साल से भूगोल विभाग में पीजी (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है। उनके अनुभवों को देखतेे हुए कॉलेज प्रशासन ने एनआईटी उत्तराखंड को पत्र लिखकर उन्हें वापस भेजने का अनुरोध किया था। इस पर एनआईटी के निदेशक प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने मूल संस्थान के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। यहां बता दें कि वर्तमान में एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी और अस्थायी परिसरों की निर्माण प्रक्रिया प्रगति पर है। डॉ. काला और चार माह पूर्व स्थायी निदेशक प्रो. अवस्थी के आने के बाद निर्माण कार्य ने गति पकड़ी थी।
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साहू जैन कॉलेज के नजीबाबाद में भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीएम काला की 4 नवंबर 2020 को एनआईटी उत्तराखंड में कुलसचिव पद पर नियुक्ति हुई थी। 13 नवंबर को उन्होंने एनआईटी में पदभार ग्रहण किया था। वह पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए थे, लेकिन बृहस्पतिवार को वह कुलसचिव पद से कार्यमुुक्त होकर अपने मूल संस्थान मेें लौट गए। अभी उनका साढ़े तीन साल का कार्यकाल शेष था।
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डॉ. काला ने बताया कि उनके मूल संस्थान साहू जैन कॉलेज में इस साल से भूगोल विभाग में पीजी (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है। उनके अनुभवों को देखतेे हुए कॉलेज प्रशासन ने एनआईटी उत्तराखंड को पत्र लिखकर उन्हें वापस भेजने का अनुरोध किया था। इस पर एनआईटी के निदेशक प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने मूल संस्थान के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। यहां बता दें कि वर्तमान में एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी और अस्थायी परिसरों की निर्माण प्रक्रिया प्रगति पर है। डॉ. काला और चार माह पूर्व स्थायी निदेशक प्रो. अवस्थी के आने के बाद निर्माण कार्य ने गति पकड़ी थी।
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