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14 माह बाद श्रीनगर में पीडीपी की पहली बैठक
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श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद पहली बार श्रीनगर में अपने वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष अब्दुल रेहमान वीरी ने की। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों को दुबारा शुरू करने को लेकर भी चर्चा की गई और यह भी कहा गया कि चुनावों में भाग लेने पर तब सोचा जाएगा जब पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की रिहाई होगी।
श्रीनगर में पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में वीरी के अलावा जनरल सचिव ग़ुलाम नबी लोन हंजूरा, निजामुदीन भट, ऐजाज मीर, नईम अख्तर व पूर्व विधायक और युवा नेता भी मौजूद थे। ग़ुलाम नबी लोन हंजूरा ने कहा कि करीब 14 महीने के बाद यह पहली बैठक बुलाई गई है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत सभी नेताओं को नजरबंद किया गया था। आज भी महबूबा मुफ्ती के बिना बैठक हो रही है। हंजूरा ने कहा कि आज से पीडीपी की सियासी गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
सियासी दलों को दबाकर रखना चाहती है भाजपा
हंजूरा ने कहा कि हम आज भी पार्टी के संस्थापक द्वारा 1999 में पार्टी के गठन के दौरान दिये गए नारे पर बुलंद हैं और उसी एजेंडे पर हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि मसले का हल गोली से नहीं बोली से निकल सकता है। हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को और सभी हितधारकों के साथ भी बातचीत की जाए। भाजपा उन सभी सियासी दलों को दबाकर रखना चाहती है जो उनके विपरीत विचारधारा रखती है। लेकिन पीडीपी का कोई भी नेता और कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। हंजूरा ने कहा कि हमें भले ही रिलीज कर दिया है, लेकिन हमें उस लायक नहीं रखा गया कि हम लोगों के बीच जा सकें। हमारे सभी नेताओं की सुरक्षा और गाड़ियां वापस ले ली गई हैं, जबकि भाजपा के छोटे से छोटे कार्यकर्ता के पास बीपी गाडियां और एस्कॉर्ट है।
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महबूबा मुफ्ती को रिहा करने पर जोर
हंजूरा ने महबूबा मुफ्ती की रिहाई पर जोर देते हुए कहा कि बाकी उन लोगों को भी छोड़ा जाना चाहिए जो राज्य और राज्य से बाहर की जेलों में बंद हैं ताकि यहां राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो सकें। जहां तक चुनाव की बात है उस पर तभी निर्णय लिया जाएगा जब महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जाएगा। हंजूरा ने शोपियां मुठभेड़ की ज्यूडीशियल जांच की मांग की है।
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श्रीनगर में पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में वीरी के अलावा जनरल सचिव ग़ुलाम नबी लोन हंजूरा, निजामुदीन भट, ऐजाज मीर, नईम अख्तर व पूर्व विधायक और युवा नेता भी मौजूद थे। ग़ुलाम नबी लोन हंजूरा ने कहा कि करीब 14 महीने के बाद यह पहली बैठक बुलाई गई है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत सभी नेताओं को नजरबंद किया गया था। आज भी महबूबा मुफ्ती के बिना बैठक हो रही है। हंजूरा ने कहा कि आज से पीडीपी की सियासी गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
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सियासी दलों को दबाकर रखना चाहती है भाजपा
हंजूरा ने कहा कि हम आज भी पार्टी के संस्थापक द्वारा 1999 में पार्टी के गठन के दौरान दिये गए नारे पर बुलंद हैं और उसी एजेंडे पर हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि मसले का हल गोली से नहीं बोली से निकल सकता है। हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को और सभी हितधारकों के साथ भी बातचीत की जाए। भाजपा उन सभी सियासी दलों को दबाकर रखना चाहती है जो उनके विपरीत विचारधारा रखती है। लेकिन पीडीपी का कोई भी नेता और कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। हंजूरा ने कहा कि हमें भले ही रिलीज कर दिया है, लेकिन हमें उस लायक नहीं रखा गया कि हम लोगों के बीच जा सकें। हमारे सभी नेताओं की सुरक्षा और गाड़ियां वापस ले ली गई हैं, जबकि भाजपा के छोटे से छोटे कार्यकर्ता के पास बीपी गाडियां और एस्कॉर्ट है।
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महबूबा मुफ्ती को रिहा करने पर जोर
हंजूरा ने महबूबा मुफ्ती की रिहाई पर जोर देते हुए कहा कि बाकी उन लोगों को भी छोड़ा जाना चाहिए जो राज्य और राज्य से बाहर की जेलों में बंद हैं ताकि यहां राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो सकें। जहां तक चुनाव की बात है उस पर तभी निर्णय लिया जाएगा जब महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जाएगा। हंजूरा ने शोपियां मुठभेड़ की ज्यूडीशियल जांच की मांग की है।