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नाबालिग से दुराचार के दोषी को 10 साल की सश्रम कैद
Updated Fri, 06 Oct 2017 10:55 PM IST
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पौड़ी। नाबालिग लड़की से दुराचार के दोषी को अदालत ने 10 साल की सश्रम कैद और 14 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
घटना देवप्रयाग थाना क्षेत्र की है। पीड़िता के दादा ने 10 जुलाई 2017 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी अनिल कुमार पुत्र सोहनलाल निवासी घोरसाड़ पट्टी टिहरी गढ़वाल उनकी 13 वर्षीय पोती को घुमाने के बहाने ऋषिकेश, विकासनगर और हिमाचल ले गया। इस दौरान आरोपी ने उसके साथ दुराचार किया। पुलिस ने मामले में पोक्सो अधिनियम, अपहरण और दुराचार की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तब से आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में था। लड़की ने पुलिस को दिए बयान में दादा पर भी दुराचार का आरोप लगाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजक शासकीय अधिवक्ता राकेश सामवेदी ने अदालत में कुल सात गवाह पेश किए और दोषी को इस सख्त सजा देने की गुहार लगाई। अदालत में अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य और गवाहों के बल पर आरोपी अनिल कुमार पर दोष साबित कराने में सफल रहा। अनिल कुमार के दोषी साबित होने पर अदालत ने उसे 10 साल की सश्रम कैद और 14 हजार रुपये जुुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि पीड़िता के दादा को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी और सहायक शासकीय अधिवक्ता पीवी पंत ने भी मामले की पैरवी की।
घटना देवप्रयाग थाना क्षेत्र की है। पीड़िता के दादा ने 10 जुलाई 2017 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी अनिल कुमार पुत्र सोहनलाल निवासी घोरसाड़ पट्टी टिहरी गढ़वाल उनकी 13 वर्षीय पोती को घुमाने के बहाने ऋषिकेश, विकासनगर और हिमाचल ले गया। इस दौरान आरोपी ने उसके साथ दुराचार किया। पुलिस ने मामले में पोक्सो अधिनियम, अपहरण और दुराचार की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तब से आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में था। लड़की ने पुलिस को दिए बयान में दादा पर भी दुराचार का आरोप लगाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजक शासकीय अधिवक्ता राकेश सामवेदी ने अदालत में कुल सात गवाह पेश किए और दोषी को इस सख्त सजा देने की गुहार लगाई। अदालत में अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य और गवाहों के बल पर आरोपी अनिल कुमार पर दोष साबित कराने में सफल रहा। अनिल कुमार के दोषी साबित होने पर अदालत ने उसे 10 साल की सश्रम कैद और 14 हजार रुपये जुुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि पीड़िता के दादा को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी और सहायक शासकीय अधिवक्ता पीवी पंत ने भी मामले की पैरवी की।
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