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Pauri News: जीवीके कार्यालय में तालाबंदी की कोशिश, पुलिस चार लोगों को थाने लाई
Fri, 23 Oct 2026 11:36 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:36 PM IST
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विस्थापन और क्षतिपूर्ति भुगतान की मांग के लिए हैं आंदोलनरत
परियोजना संचालक कंपनी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे थे परियोजना प्रभावित
फोट
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। अलकनंदा जल विद्युत परियोजना संचालक कंपनी जीवीके के कोटेश्वर डैम कॉलोनी स्थित कार्यालय के बाहर विस्थापन और क्षतिपूर्ति भुगतान की मांग को लेकर धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने शुक्रवार को कंपनी कार्यालय पर तालाबंदी की कोशिश की। सूचना पर वहां पुलिस पहुंच गई। इस दाैरान कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की नोकझोंक भी हुई तो पुलिस चार लोगों को जबरन उठाकर थाने ले गई। बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
शुक्रवार को पत्रकारवार्ता के बाद भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के संयोजक दौलत कुंवर के नेतृत्व में परियोजना प्रभावित कंपनी कार्यालय पहुंचे। सुरक्षा कर्मियों ने मुख्य गेट पर तालाबंदी की कोशिश की तो सूचना पर पुलिस पहुंच गई। इस दाैरान दौलत कुंवर ने आरोप लगाया कि धारी थलीसैंण, मंगसू और गुगली सहित अन्य गांवों में कुछ परिवारों को विस्थापन और क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया जबकि कई परिवार छूट गए। कुछ को दिए गए चेक का भी भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि 5 अक्तूबर को कीर्तिनगर एसडीएम कार्यालय में धरना देने के बाद कंपनी अधिकारियों से वार्ता का आश्वासन मिला था, लेकिन वार्ता नहीं कराई गई। पुलिस ने उन्हें समझाया लेकिन वह नहीं माने और गेट पर तालाबंदी की कोशिश करने लगे। ऐसे में पुलिस दौलत कुंवर, सुनीता पांडेय, सरस्वती और शंकर लाल को वाहन में बैठाकर थाने ले आई। वहीं गीता देवी, लक्ष्मी देवी, शकुंतला देवी, अनिता देवी और जगदीश लाल कंपनी परिसर में डटे रहे। वहीं थाना प्रभारी एसओ कुलदीप सिंह ने कहा कि आंदोलनकारियों को थाने लाने के कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। वहीं दौलत कुंवर ने कहा कि मांगें पूरी होने तक कंपनी कार्यालय के बाहर धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारी दौलत कुंवर ने बताया कि वह प्रभावितों के साथ परियोजना संचालक कंपनी कार्यालय के बाहर तब तक धरने पर डटे रहेंगे जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती।
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परियोजना संचालक कंपनी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे थे परियोजना प्रभावित
फोट
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। अलकनंदा जल विद्युत परियोजना संचालक कंपनी जीवीके के कोटेश्वर डैम कॉलोनी स्थित कार्यालय के बाहर विस्थापन और क्षतिपूर्ति भुगतान की मांग को लेकर धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने शुक्रवार को कंपनी कार्यालय पर तालाबंदी की कोशिश की। सूचना पर वहां पुलिस पहुंच गई। इस दाैरान कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की नोकझोंक भी हुई तो पुलिस चार लोगों को जबरन उठाकर थाने ले गई। बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
शुक्रवार को पत्रकारवार्ता के बाद भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के संयोजक दौलत कुंवर के नेतृत्व में परियोजना प्रभावित कंपनी कार्यालय पहुंचे। सुरक्षा कर्मियों ने मुख्य गेट पर तालाबंदी की कोशिश की तो सूचना पर पुलिस पहुंच गई। इस दाैरान दौलत कुंवर ने आरोप लगाया कि धारी थलीसैंण, मंगसू और गुगली सहित अन्य गांवों में कुछ परिवारों को विस्थापन और क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया जबकि कई परिवार छूट गए। कुछ को दिए गए चेक का भी भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि 5 अक्तूबर को कीर्तिनगर एसडीएम कार्यालय में धरना देने के बाद कंपनी अधिकारियों से वार्ता का आश्वासन मिला था, लेकिन वार्ता नहीं कराई गई। पुलिस ने उन्हें समझाया लेकिन वह नहीं माने और गेट पर तालाबंदी की कोशिश करने लगे। ऐसे में पुलिस दौलत कुंवर, सुनीता पांडेय, सरस्वती और शंकर लाल को वाहन में बैठाकर थाने ले आई। वहीं गीता देवी, लक्ष्मी देवी, शकुंतला देवी, अनिता देवी और जगदीश लाल कंपनी परिसर में डटे रहे। वहीं थाना प्रभारी एसओ कुलदीप सिंह ने कहा कि आंदोलनकारियों को थाने लाने के कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। वहीं दौलत कुंवर ने कहा कि मांगें पूरी होने तक कंपनी कार्यालय के बाहर धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारी दौलत कुंवर ने बताया कि वह प्रभावितों के साथ परियोजना संचालक कंपनी कार्यालय के बाहर तब तक धरने पर डटे रहेंगे जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती।
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