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सेना का हिस्सा बने 184 जांबाज
Pauri
Updated Sun, 05 May 2013 05:30 AM IST
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लैंसडौन। कंधे पर राइफल लटकाए, फौलादी इरादों के साथ सीना ताने 184 रिक्रूट शनिवार को सेना में शामिल हो गए। बहादुरी की प्रतीक रायल रस्सी को कंधे पर सजाकर हल्के कदमों से पग भरते हुए इन बहादुर जवानों ने पासिंग आउट परेड में पद, गोपनीयता और राष्ट्र सेवा में तत्पर रहने की शपथ ली तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
शनिवार को गढवाल राइफल्स के परेड़ मैदान में 47वें कोर्स के 184 रिक्रूटों को पुनरीक्षक अधिकारी ब्रिगेडियर अजय सेठ ने शपथ दिलाई। उन्होंने गढ़वाल राइफल के गौरवमयी इतिहास के बारे में जानकारी दी और उम्मीद जताई कि सेना का हिस्सा बन रहे जवान रेजीमेंट के उच्च आदर्शों को आत्मसात करेंगे। रेजिमेंटल पुरोहित सूबेदार महिधर चमोली ने धार्मिक ग्रंथ पर हाथ रखवाकर भेदभाव से हटकर कर्तव्यनिष्ठ होने का संकल्प कराया।
तालियों से गूंजता रहा मैदान
- जैसे ही रिक्रूट पासिंग आउट परेड करते हुए मैदान में पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। ब्रिगेडियर अजय सेठ ने परेड की सलामी ली। परेड का नेतृत्व कमांडर सुदामा प्रसाद ने किया। परेड के बाद सभी जवानों ने वीर सैनिकों की प्रतिमा के सामने जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस महत्वपूर्ण पल का हिस्सा बनने के लिए जवानों के परिजन भी आए हुए थे।
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सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थियों में प्रदीप को मिला गोल्ड मेडल
- 34 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ रहे रिक्रूटों को पुनरीक्षक अधिकारी ने मेडल प्रदान किए। प्रदीप गड़िया को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थी घोषित किया गया। उन्हें स्वर्ण पदक दिया गया। सुदामा प्रसाद को सिल्वर मेडल के साथ ड्रिल और परेड कमांडर का मेडल भी दिया गया। राहुल को कांस्य पदक के साथ फायरिंग के लिए पदक दिया गया। भूपेंद्र सिंह को पीटी के लिए मेडल दिया गया।
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शनिवार को गढवाल राइफल्स के परेड़ मैदान में 47वें कोर्स के 184 रिक्रूटों को पुनरीक्षक अधिकारी ब्रिगेडियर अजय सेठ ने शपथ दिलाई। उन्होंने गढ़वाल राइफल के गौरवमयी इतिहास के बारे में जानकारी दी और उम्मीद जताई कि सेना का हिस्सा बन रहे जवान रेजीमेंट के उच्च आदर्शों को आत्मसात करेंगे। रेजिमेंटल पुरोहित सूबेदार महिधर चमोली ने धार्मिक ग्रंथ पर हाथ रखवाकर भेदभाव से हटकर कर्तव्यनिष्ठ होने का संकल्प कराया।
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तालियों से गूंजता रहा मैदान
- जैसे ही रिक्रूट पासिंग आउट परेड करते हुए मैदान में पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। ब्रिगेडियर अजय सेठ ने परेड की सलामी ली। परेड का नेतृत्व कमांडर सुदामा प्रसाद ने किया। परेड के बाद सभी जवानों ने वीर सैनिकों की प्रतिमा के सामने जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस महत्वपूर्ण पल का हिस्सा बनने के लिए जवानों के परिजन भी आए हुए थे।
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सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थियों में प्रदीप को मिला गोल्ड मेडल
- 34 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ रहे रिक्रूटों को पुनरीक्षक अधिकारी ने मेडल प्रदान किए। प्रदीप गड़िया को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थी घोषित किया गया। उन्हें स्वर्ण पदक दिया गया। सुदामा प्रसाद को सिल्वर मेडल के साथ ड्रिल और परेड कमांडर का मेडल भी दिया गया। राहुल को कांस्य पदक के साथ फायरिंग के लिए पदक दिया गया। भूपेंद्र सिंह को पीटी के लिए मेडल दिया गया।