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श्रीकोट गंगानाली में दो गंदे नाले होंगे टेप
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श्रीनगर। नगर पालिका विस्तारित क्षेत्र श्रीकोट गंगानाली में भी दो गंदे नालों को अलकनंदा नदी में सीधे गिरने से रोका जाएगा। नमामि गंगे परियोजना के तहत नालों को टेप करने की मंजूरी मिल गई है। फिलहाल चुनाव आचार संहिता के चलते टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। कार्यदायी संस्था निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) पेयजल निगम के अनुसार, चुनाव आयोग से टेंडर आमंत्रित करने की अनुमति मांगी गई है।
मौजूदा समय में नगर पालिका क्षेत्र श्रीनगर में 17 गंदे नालों को टेप करने का काम चल रहा है। इसके अलावा पालिका के श्रीकोट क्षेत्र में भी लगभग छह बरसाती और घरों की गंदगी युक्त नाले सीधे अलकनंदा नदी में जा रहे हैं। दिक्कत यह है कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद से इस क्षेत्र में अलकनंदा का मूल प्रवाह कम हो गया है और इस क्षेत्र में श्रीनगर, पौड़ी व चौरास क्षेत्र की पंपिंग पेयजल योजना भी स्थित है। उपभोक्ताओं की शिकायत रहती है कि यह गंदा पानी पंप हाउस तक चला जाता है। साथ ही इन नालों से गंदगी भी हो रही है।
निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) पेयजल निगम के परियोजना प्रबंधक सीपीएस रावत ने बताया कि श्रीकोट में पांच नालों के पैरामीटर्स मापे गए थे। इनमें दो नाले काफी गंदे मिले। इनको टेप किया जा रहा है। श्रीकोट में 50 केएलडी और 70 केएलडी क्षमता के दो एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) भी बनेंगे। नाले टेप होने के बाद एसटीपी में जाएंगे। जहां पानी शोधन के बाद नदी में प्रवाहित होगा।
मौजूदा समय में नगर पालिका क्षेत्र श्रीनगर में 17 गंदे नालों को टेप करने का काम चल रहा है। इसके अलावा पालिका के श्रीकोट क्षेत्र में भी लगभग छह बरसाती और घरों की गंदगी युक्त नाले सीधे अलकनंदा नदी में जा रहे हैं। दिक्कत यह है कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद से इस क्षेत्र में अलकनंदा का मूल प्रवाह कम हो गया है और इस क्षेत्र में श्रीनगर, पौड़ी व चौरास क्षेत्र की पंपिंग पेयजल योजना भी स्थित है। उपभोक्ताओं की शिकायत रहती है कि यह गंदा पानी पंप हाउस तक चला जाता है। साथ ही इन नालों से गंदगी भी हो रही है।
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निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) पेयजल निगम के परियोजना प्रबंधक सीपीएस रावत ने बताया कि श्रीकोट में पांच नालों के पैरामीटर्स मापे गए थे। इनमें दो नाले काफी गंदे मिले। इनको टेप किया जा रहा है। श्रीकोट में 50 केएलडी और 70 केएलडी क्षमता के दो एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) भी बनेंगे। नाले टेप होने के बाद एसटीपी में जाएंगे। जहां पानी शोधन के बाद नदी में प्रवाहित होगा।
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