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एनआईटी के अस्थायी परिसर में बनेगा 500 बेड का हॉस्टल
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस के विस्तार का आगणन बीओजी (बोर्ड ऑफ गवर्नर) में पास हो गया है। इसके अनुसार एनआईटी के अस्थायी परिसर मेंअब सात माह के अंदर 500 बेड के हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। ताकि सेटेलाइट परिसर एमएनआईटी जयपुर (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में पढ़ रहे छात्रों को यहां वापस लाया जा सके। संस्थान ने निर्माण कार्य का जिम्मा सीपीडब्लूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) को दिया है।
वर्ष 2009-10 से एनआईटी उत्तराखंड भक्तियाना स्थित आईटीआई और पॉलीटेक्निक की भूमि में संचालित हो रहा है। जबकि स्थायी परिसर का निर्माण सुमाड़ी में होना है, लेकिन स्थायी परिसर का निर्माण होने तक भक्तियाना में ही अस्थायी परिसर के विस्तारीकरण का शिक्षा मंत्रालय ने निर्णय लिया है। विस्तारीकरण के लिए राज्य सरकार ने आईटीआई और रेशम फार्म की जमीन निशुल्क दी है। गत जुलाई माह में केेंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 78.81 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दे दी। एनआईटी के निदेशक प्रो. श्यामलाल सोनी ने बताया कि बीओजी में प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य सीपीडब्लूडी को दे दिया गया है। अस्थायी परिसर में निर्माण कार्य स्थायी होंगे। अगले 6-7 माह के अंदर 500 बेड के हॉस्टल का निर्माण हो जाएगा, जिससे छात्रों के रहने की समस्या खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि विस्तारीकरण के बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। यहां अन्य भवन भी बनाए जाएंगे। स्थायी परिसर का निर्माण हो जाने पर यह स्थान ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनबल हिमालय’ के रुप में काम करेगा। इसके लिए आईआईपी देहरादून से भी एमओयू हुआ है।
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वर्ष 2009-10 से एनआईटी उत्तराखंड भक्तियाना स्थित आईटीआई और पॉलीटेक्निक की भूमि में संचालित हो रहा है। जबकि स्थायी परिसर का निर्माण सुमाड़ी में होना है, लेकिन स्थायी परिसर का निर्माण होने तक भक्तियाना में ही अस्थायी परिसर के विस्तारीकरण का शिक्षा मंत्रालय ने निर्णय लिया है। विस्तारीकरण के लिए राज्य सरकार ने आईटीआई और रेशम फार्म की जमीन निशुल्क दी है। गत जुलाई माह में केेंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 78.81 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दे दी। एनआईटी के निदेशक प्रो. श्यामलाल सोनी ने बताया कि बीओजी में प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य सीपीडब्लूडी को दे दिया गया है। अस्थायी परिसर में निर्माण कार्य स्थायी होंगे। अगले 6-7 माह के अंदर 500 बेड के हॉस्टल का निर्माण हो जाएगा, जिससे छात्रों के रहने की समस्या खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि विस्तारीकरण के बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। यहां अन्य भवन भी बनाए जाएंगे। स्थायी परिसर का निर्माण हो जाने पर यह स्थान ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनबल हिमालय’ के रुप में काम करेगा। इसके लिए आईआईपी देहरादून से भी एमओयू हुआ है।
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