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गढ़वाल मंडल के पुरातत्व अधिकारी ने भी दून में जमाया डेरा
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:33 PM IST
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पौड़ी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी वर्ष 2013 से देहरादून से ही गढ़वाल मंडल के सात जिलों को हांक रहे हैं। साहब की तनख्वाह भी पुरातत्व विभाग पौड़ी से निकलती है, लेकिन तनख्वाह के बिल साइन करवाने कर्मचारियों को दून के चक्कर काटने पड़ते हैं। फिलवक्त विभाग के कर्मचारी, अधिकारी की राह ताक रहे हैं।
गंगा, यमुना, पंचप्रयाग, पंच केदार, पंच बदरी, गंगोत्री, यमुनोत्री व सांस्कृतिक गतिविधियों को देखते हुए वर्ष 1984 में मंडल मुख्यालय पौड़ी में क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग की इकाई गठित हुई। प्राचीन संपदा का अन्वेषण, अभिलेखीकरण, प्राचीन स्मारकों का संरक्षण व संवर्द्धन विभाग के मुख्य कार्य हैं। 7वीं-8वीं से लेकर 17वीं शताब्दी के मंदिर व मठों पर कार्य आरंभ हुआ। प्रदेश गठन के बाद मंडल का यह कार्यालय हाशिए की ओर है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी आशीष कुमार को वर्ष 2013 में सहायक निदेशक संस्कृति, उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई। अतिरिक्त जिम्मेदारी क्या मिली कि साहब देहरादून ही जम गए। वापस आने का नाम तक नहीं ले रहे। भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य की जिम्मेदारी तक उनके पास है। 26 नवंबर को भातखंडे का वार्षिकोत्सव हुआ। प्राचार्य के नाम से निमंत्रण पत्र दिए गए, लेकिन कार्यक्रम में साहब नदारद रहे। कर्मचारियों से जब बातचीत की गई तो उनका कहना है कि अधिकारी की अनुपस्थिति में कई महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बिल भी दून में ही साइन हो रहे हैं।
कोट
पुरातत्व विभाग अपने कार्य कर रहा है। कोशिश रहती है कि पौड़ी आऊं। दून में कार्य की व्यस्तता अधिक है, इसलिए आना-जाना कम हो रहा है।
-आशीष कुमार, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी गढ़वाल मंडल पौड़ी।
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गंगा, यमुना, पंचप्रयाग, पंच केदार, पंच बदरी, गंगोत्री, यमुनोत्री व सांस्कृतिक गतिविधियों को देखते हुए वर्ष 1984 में मंडल मुख्यालय पौड़ी में क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग की इकाई गठित हुई। प्राचीन संपदा का अन्वेषण, अभिलेखीकरण, प्राचीन स्मारकों का संरक्षण व संवर्द्धन विभाग के मुख्य कार्य हैं। 7वीं-8वीं से लेकर 17वीं शताब्दी के मंदिर व मठों पर कार्य आरंभ हुआ। प्रदेश गठन के बाद मंडल का यह कार्यालय हाशिए की ओर है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी आशीष कुमार को वर्ष 2013 में सहायक निदेशक संस्कृति, उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई। अतिरिक्त जिम्मेदारी क्या मिली कि साहब देहरादून ही जम गए। वापस आने का नाम तक नहीं ले रहे। भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य की जिम्मेदारी तक उनके पास है। 26 नवंबर को भातखंडे का वार्षिकोत्सव हुआ। प्राचार्य के नाम से निमंत्रण पत्र दिए गए, लेकिन कार्यक्रम में साहब नदारद रहे। कर्मचारियों से जब बातचीत की गई तो उनका कहना है कि अधिकारी की अनुपस्थिति में कई महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बिल भी दून में ही साइन हो रहे हैं।
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कोट
पुरातत्व विभाग अपने कार्य कर रहा है। कोशिश रहती है कि पौड़ी आऊं। दून में कार्य की व्यस्तता अधिक है, इसलिए आना-जाना कम हो रहा है।
-आशीष कुमार, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी गढ़वाल मंडल पौड़ी।