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विकास प्राधिकरण में पीठासीन अफसर अब तक नियुक्त क्यों नहीं
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने पर सरकार से पूछा है कि भूमि अर्जन एवं विकास प्राधिकरण में पीठासीन के पद पर अब तक नियुक्ति क्यों और किस वजह से नहीं हुई है। कोर्ट ने सरकार को दो दिन का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तिथि नियत की है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी गढ़वाल निवासी अनिल किशोर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि प्राधिकरण में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से उनके साथ ही भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से संबंधित 39 मामले लंबित हैं। पीठासीन अधिकारी डेढ़ साल पहले रिटायर हो चुके हैं। तब से यह महत्वपूर्ण पद रिक्त चला आ रहा है। याचिका में कहा कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग निर्माणाधीन है। टिहरी गढ़वाल के मथेला में रेलवे स्टेशन बन रहा है। इसके लिए याचिकाकर्ता की करीब दो सौ नाली भूमि का अधिग्रहण किया गया है। यह भूमि ग्रामीणों की थी और याचिकाकर्ता को औद्यानिकी के लिए दी गई है। टिहरी के जिला मजिस्ट्रेट ने भी याचिकाकर्ता को मुआवजा देने के आदेश पारित किए हैं। रेलवे स्टेशन के लिए अधिग्रहीत भूमि का अब तक रेलवे की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया। याचिका में कहा कि यह मामला राज्य भूमि अर्जन विकास प्राधिकरण में लंबित है। लेकिन पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से सुनवाई में नहीं आ सका है। संवाद
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न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी गढ़वाल निवासी अनिल किशोर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि प्राधिकरण में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से उनके साथ ही भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से संबंधित 39 मामले लंबित हैं। पीठासीन अधिकारी डेढ़ साल पहले रिटायर हो चुके हैं। तब से यह महत्वपूर्ण पद रिक्त चला आ रहा है। याचिका में कहा कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग निर्माणाधीन है। टिहरी गढ़वाल के मथेला में रेलवे स्टेशन बन रहा है। इसके लिए याचिकाकर्ता की करीब दो सौ नाली भूमि का अधिग्रहण किया गया है। यह भूमि ग्रामीणों की थी और याचिकाकर्ता को औद्यानिकी के लिए दी गई है। टिहरी के जिला मजिस्ट्रेट ने भी याचिकाकर्ता को मुआवजा देने के आदेश पारित किए हैं। रेलवे स्टेशन के लिए अधिग्रहीत भूमि का अब तक रेलवे की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया। याचिका में कहा कि यह मामला राज्य भूमि अर्जन विकास प्राधिकरण में लंबित है। लेकिन पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से सुनवाई में नहीं आ सका है। संवाद
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