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नारी तू नारायणी: बहन को बाघ से बचाने के लिए बनी शेरनी, घायल लीला को देखकर बनी रणचंडी; आदमखोर को भगाकर लिया दम
Fri, 04 Oct 2024 12:10 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर
अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Fri, 04 Oct 2024 12:10 PM IST
सार
वनग्राम आमडंडा खत्ता की महिला अपनी छोटी बहन की जिंदगी बचाने के लिए जान की परवाह किए बगैर बाघ से भिड़ गई। बहन को लहूलुहान हालत में देख महिला ने मानो रणचंडी का रूप धर लिया और टाइगर को भगाकर ही दम लिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
रामनगर के वनग्राम आमडंडा खत्ता की महिला अपनी छोटी बहन की जिंदगी बचाने के लिए जान की परवाह किए बगैर बाघ से भिड़ गई। बहन को लहूलुहान हालत में देख महिला ने मानो रणचंडी का रूप धर लिया और टाइगर को भगाकर ही दम लिया। घायल महिला की हालत अब ठीक है।
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जून की शाम को करीब 5.30 बजे लीला देवी पत्नी कामदेव उम्र 40 वर्ष अपनी बड़ी बहन तारा देवी और एक अन्य महिला सरस्वती देवी के साथ रिगोड़ा के पास नेशनल हाईवे के किनारे घास काट ही रही थी, तभी वहां घात लगाए बैठे बाघ ने लीला देवी पर हमला कर दिया था। बाघ लीला देवी को घसीटकर जंगल में ले जाने लगा तभी बड़ी बहन तारा देवी ने हिम्मत दिखाई और बहन की जान बचाने के लिए बाघ से भिड़ गई।
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बाघ ने गुर्राकर डराने का भी किया लेकिन तारा ने पास में पड़ी लकड़ियों से उस पर हमला बोल दिया। बाघ भी तारा देवी के हिम्मत के आगे हार गया और लीला देवी को छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया। लीला देवी अब ठीक है और बड़ी बहन तारा देवी की शुक्रगुजार है।