सियासी स्कैन: उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल, आधी रात तक उड़ा रहा नेताजी का चैन; इधर जाऊं या उधर ?
नैनीताल लोकसभा सीट पर भाजपा की नामांकन रैली में तराई के एक दिग्गज नेता के शामिल होने की चर्चा सियासी गलियारे में दौड़ती रही। दिग्गज से चुनाव में मात खाए नेता के कानों तक चर्चा पहुंची तो वह बेचैन हो गए। पढ़िए पूरी खबर...
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नैनीताल लोकसभा सीट पर भाजपा की नामांकन रैली में तराई के एक दिग्गज नेता के शामिल होने की चर्चा सियासी गलियारे में दौड़ती रही। दिग्गज से चुनाव में मात खाए नेता के कानों तक चर्चा पहुंची तो वह बेचैन हो गए। टिकट नहीं मिलने और सियासी दुश्मन के पार्टी में शामिल होने का झटका खाए नेताजी तुरंत सक्रिय हो गए। उन्होंने शाम से रात होते-होते कई नेताओं को फोन घुमा दिए।
दिग्गज के आने से नेताजी का राजनीतिक कॅरिअर दांव पर लगना था तो घबराहट होना स्वाभाविक था। हालांकि मजबूत जगह से नेताजी को दिग्गज की ज्वाइनिंग नहीं होने का मजबूत आश्वासन मिला तो उन्हें सुकून मिला। ज्वाइनिंग के चर्चे नामांकन रैली में कई बड़े नेताओं की जुबां पर भी थे। अब चर्चा करने वाले कह रहे हैं कि भला हो ज्वाइनिंग नहीं हो पाई, वरना नेताजी का न जाने क्या होता।
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इधर जाऊं या उधर ?
जनीति भी अजीब चस्के वाली चीज है। इसका चस्का ताउम्र पीछा नहीं छोड़ता। कुर्सी का लालच जीवनभर बना रहता है। अल्मोड़ा-बागेश्वर की राजनीति में नेतागीरी की चाह एक शख्स को ऐसा चस्का लगा कि उन्होंने अपनी अच्छी खासी सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया। भाजपा से सियासी पारी की शुरुआत करने वाले यह शख्स वहां राजनीतिक भविष्य न बनता देख, किनारे हो गए। एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव भी लड़ लिया। बीच में कांग्रेस की भी परिक्रमा कर आए।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बागेश्वर विधानसभा सीट से कांग्रेस से टिकट चाह रहे थे, लेकिन आलाकमान का भरोसा जीत नहीं पाए। फिर पाला बदल तो भाजपा के हो गए। 2023 के बागेश्वर विधानसभा उप चुनाव में इनकी निष्ठा और सज्जनता पर पार्टी में भीतरखाने कानाफूसी भी हुई मगर हासिल कुछ नहीं हुआ। अनमने ढंग से ही सही, पार्टी में वह बने रहे। इस बार इन्होंने सांसदी के टिकट के लिए दावेदारी की। अल्मोड़ा से बागेश्वर तक चप्पे-चप्पे पर नेताजी के शुभकामनाओं वाले पोस्टर चिपकाए गए।
टिकट को लेकर आशान्वित भी थे। गाहेबगाहे इसकी चर्चा अपनों करते भी रहे। यहां तक कहा गया कि इस बार पार्टी प्रत्याशी चयन में बदलाव कर रही है, लेकिन टिकट के मामले में फिर पिछड़ गए। पार्टी में टिकट फाइनल होने के बाद नेताजी नेपथ्य में हैं। कोई सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। चुनाव में नेताजी की क्या और कैसी भूमिका रहेगी, यह कोई नहीं जानता।