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यूटीईटी प्रथम में बढ़े, द्वितीय में घटे अभ्यर्थी
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प्रतीकात्मक।
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रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड अध्यापक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) के लिए इस बार आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई। यूटीईटी प्रथम में तो अभ्यर्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई, जबकि द्वितीय में आवेदन करने वालों की संख्या कम हुई है। इस साल उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद द्वारा यूटीईटी की परीक्षा 26 नवंबर को प्रस्तावित है।
प्राथमिक और जूनियर शिक्षक बनने के लिए यूटीईटी प्रथम व द्वितीय उत्तीर्ण का प्रमाणपत्र अनिवार्य है। परिषद द्वारा यूटीईटी के आवेदन ऑनलाइन भरने की तिथि एक सितंबर से 30 सितंबर तक निर्धारित की गई थी। जबकि फीस ऑनलाइन जमा करने के लिए चार अक्तूबर तक छूट दी थी। अब पूरे आवेदन परिषद को प्राप्त हो चुके हैं। इस बार यूटीईटी प्रथम के लिए 44975 तथा द्वितीय के लिए 39871 आवेदन परिषद को मिले हैं। जबकि पिछले यूटीईटी प्रथम के लिए 42817 व द्वितीय के लिए 42570 आवेदन मिले थे। पिछले साल की तुलना में इस बार यूटीईटी प्रथम 2158 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। जबकि द्वितीय में 2699 अभ्यर्थी कम हो गए। आवेदनों के बाद अब परिषद द्वारा परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी में जुट गया है।
उत्तराखंड बोर्ड सचिव डॉ. नीता तिवारी ने बताया कि पहले यूटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी को जो प्रमाण पत्र मिलता था। उसकी अवधि सात साल तक ही मान्य होती थी। लेकिन अब यूटीईटी उत्तीर्ण कर चुके लोगों के प्रमाणपत्रों को आजीवन मान्यता प्रदान कर दी है। 26 नवंबर को बोर्ड की ओर से यूटीईटी की परीक्षा प्रस्तावित है।
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प्राथमिक और जूनियर शिक्षक बनने के लिए यूटीईटी प्रथम व द्वितीय उत्तीर्ण का प्रमाणपत्र अनिवार्य है। परिषद द्वारा यूटीईटी के आवेदन ऑनलाइन भरने की तिथि एक सितंबर से 30 सितंबर तक निर्धारित की गई थी। जबकि फीस ऑनलाइन जमा करने के लिए चार अक्तूबर तक छूट दी थी। अब पूरे आवेदन परिषद को प्राप्त हो चुके हैं। इस बार यूटीईटी प्रथम के लिए 44975 तथा द्वितीय के लिए 39871 आवेदन परिषद को मिले हैं। जबकि पिछले यूटीईटी प्रथम के लिए 42817 व द्वितीय के लिए 42570 आवेदन मिले थे। पिछले साल की तुलना में इस बार यूटीईटी प्रथम 2158 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। जबकि द्वितीय में 2699 अभ्यर्थी कम हो गए। आवेदनों के बाद अब परिषद द्वारा परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी में जुट गया है।
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उत्तराखंड बोर्ड सचिव डॉ. नीता तिवारी ने बताया कि पहले यूटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी को जो प्रमाण पत्र मिलता था। उसकी अवधि सात साल तक ही मान्य होती थी। लेकिन अब यूटीईटी उत्तीर्ण कर चुके लोगों के प्रमाणपत्रों को आजीवन मान्यता प्रदान कर दी है। 26 नवंबर को बोर्ड की ओर से यूटीईटी की परीक्षा प्रस्तावित है।
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