{"_id":"3c69d916802d68264cbc31d50d6eae3a","slug":"trse-bass-rural-infrastructure-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूलभूत सुविधाओं को तरसे बवास के ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मूलभूत सुविधाओं को तरसे बवास के ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बेतालघाट (नैनीताल)।
Updated Thu, 28 Jan 2016 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेतालघाट ब्लाक में एक गांव ऐसा भी है जिसका एक हिस्सा बेतालघाट ब्लाक में तो दूसरा कोटाबाग ब्लाक में पड़ता है।
विज्ञापन
दो ब्लाकों के अधीन होने के बावजूद इस गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यातायात व्यवस्था के नाम पर रामनगर से गांव तक केमू की एकमात्र बस आती है।
यदि यह बस छूट जाए तो यात्री पैदल हो जाते हैं। नेता भी यहां केवल चुनाव के दौरान वोट मांगने के लिए ही आते हैं। चुनाव होने के बाद राजनैतिक दल और नेता दोनों ही यहां के मतदाताओं को पांच साल के लिए भूल जाते हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों की मांगों को आज तक कोई तवज्जो नहीं दी गई है।
विज्ञापन
बवास गांव बेतालघाट से बीस किमी और कोटाबाग से तीस किमी दूर है। गधेरे के इस पार का हिस्सा बेतालघाट में और उस पार का कोटाबाग ब्लाक में है। गांव में दर्जनों परिवार रहते हैं जिनकी रोजी रोटी खेती बाड़ी तक सीमित है। गांव में एकमात्र प्राइमरी स्कूल है।
विज्ञापन
छठी से इंटरमीडिएट तक पढ़ने वाले गांव के लगभग 25 बच्चे रोजाना सुबह पांच किलोमीटर जंगल के बीच से पैदल चलकर तल्ली सेठी या फिर इतनी ही दूरी नापकर ओखलढूंगा जाते हैं। मरीजों को इलाज के लिए 40 किलोमीटर दूर रामनगर ले जाना पड़ता है।
पशु बीमार पड़ जाएं तो दस किलोमीटर दूर डौन परेवा के पशु अस्पताल जाना पशुपालकों की मजबूरी है। डाकघर यहां है नहीं लिहाजा चिट्ठी पत्री भी महीनों में एक दो बार गांव तक पहुंचती है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए वर्षों पहले शासन ने रामनगर से अमगड़ी होते हुए सड़क स्वीकृत की।
विभाग ने पहाड़ी काटकर सड़क तो बनाई लेकिन सोलिंग करने के बाद उसमें आज तक डामरीकरण नहीं हुआ। नतीजा यह है कि पूरी सड़क में पत्थर ही पत्थर हैं। जिसके चलते ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। लोग चाहते हैं कि गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों लेकिन यह कब होगा किसी को नहीं पता।