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बाघ के पिंजरे में मुर्गी पालन, विभाग बेखबर

Tue, 22 Dec 2015 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर। Updated Tue, 22 Dec 2015 01:23 AM IST
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 Tiger in cage poultry, Department oblivious

तराई पश्चिमी वन प्रभाग बैलपड़ाव रेंज के अंतर्गत क्यारी बंदोबस्ती में कई सालों से विभाग की लापरवाही के चलते बाघ के पिंजरे में मुर्गी पालन किया जा रहा है। लेकिन विभाग को अपने पिंजरे के बारे में ही पता नहीं तो उससे अन्य वन संपदा की सुरक्षा की अपेक्षा करना बेमानी होगा। 

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दरअसल वर्ष 2013 में क्यारी के जंगल में एक गुलदार घायल अवस्था में मिला था। जिसने दो ग्रामीणों को घायल भी कर दिया था। जिस कारण विभाग को गुलदार को रेस्क्यू करने के लिये पिंजरा लगाने की नौबत आई। लेकिन गुलदार ने रेस्क्यू के समय ही दम तोड़ चुका था। जिसे घटनास्थल पर ही पोस्टमार्टम के बाद जलाकर नष्ट कर दिया गया था। लेकिन वनकर्मी अपना लाया पिंजरा वहीं छोड़ गये।
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कई महीनों तक पड़े पिंजरे को एक ग्रामीण अपने घर ले आया। उसने सालभर तक मुर्गियां पालीं फिर वहीं सड़क किनारे छोड़ दिया। कुछ युवकों ने तो पिंजरे में खाने का सामान रख उसमें क्या चीजें फंसती है इसका खेल खेलना शुरू किया तो एक दो बार लालच के चलते बंदरों को पिंजरे में कैद होना पड़ा। हालांकि बंदरों को दूर जंगल में छोड़ दिया गया था।
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इसके बाद दूसरा ग्रामीण ने इस मजबूत बाघ के पिंजरे में अपने घर पर मुर्गी पालन शुरू कर दिया है। जब इस बारे में तराई पश्चिमी वन प्रभाग की प्रभारी डीएफओ कहकशां नसीम से पूछा गया तो वह हैरानी से बोलीं कि अभी तक पिंजरा नहीं हटाया गया। कल ही वनकर्मियों को भेज पिंजरे को अपने रेंज में लाया जाएगा। जब विभाग अपना ही पिंजरा भूल रहा हो  तो उससे अन्य गतिविaधियों की क्या अपेक्षा की जा सकती है।

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