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मेलों, दस्तावेजों के साथ परंपरा और धरोहरों को बचाने की जरूरत : पांगती
Mon, 24 Feb 2025 02:11 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 24 Feb 2025 02:11 AM IST
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हल्द्वानी। पिघलता हिमालय के संस्थापक संपादक और कथाकार स्व. आनंद बल्लभ उप्रेती स्मृति 12वां सम्मान समारोह रविवार को संपन्न हो गया। हिमालय का लोक जीवन पर प्रभाव एवं लला जसुली विषय पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कथाकार उप्रेती के योगदान के साथ ही जसुली शौक्याणी का उल्लेख करते हुए भारत तिब्बत व्यापार और पड़ाव पर विस्तार से चर्चा की।
गोष्ठी में आधार वक्ता गंगा सिंह पांगती ने अपील की कि हिमालय की लोक परंपरा को विकृत न करें। उन्होंने बागेश्वर समेत पहाड़ के मेलों, दस्तावेजों के साथ प्राचीन परंपरा और धरोहरों को बचाने की अपील की। इस अवसर पर 12 विशिष्ट जनों को आनंदश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
हर गोविंद सुयाल इंटर काॅलेज सभागार में स्व. उप्रेती और दानवीरा जसुली बूढ़ी शौक्याणी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राम सिंह सोनाल ने लोक व्यवहार में अतिक्रमण से बचने और अपने इतिहास को जानने की अपील की। मुख्य अतिथि आयकर आयुक्त कुमाऊं नरेंद्र सिंह जंगपांगी ने सीमांत क्षेत्र और अपनी पुरानी यादों को साझा किया। अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ. सीडी सूठा ने स्मृति समारोह को ऐतिहासिक बताते हुए समाज को जोड़ने वाला बताया।
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आयोजन के दौरान रं समाज की पुष्पा दुग्ताल, जीवन सिंह दुग्ताल और साथियों ने रंग नृत्य गीतों से समा बांधा। बाल कलाकार गर्वित कांडपाल, तन्मय लोहनी, दक्ष तिवारी व साथियों ने बसंत गीत की सामूहिक प्रस्तुति दी। न्यौला पंचाचूली के संपादन में रंग लुग्बा के महान व्यक्तित्व पर केंद्रित पुस्तक का भी विमोचन हुआ। सेमिनार के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से 164 शोध पत्र शामिल हुए। आयोजन सचिव डाॅ. पंकज उप्रेती, संरक्षक फली सिंह दताल, आचार्य धीरज उप्रेती ने अतिथियों का स्वागत किया और आभार जताया। अंजनी बोनाल, डाॅ. जयश्री भंडारी, डाॅ. गोकुल सिंह सत्याल, उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक प्रो. पीसी बाराकोटी, एनसी तिवारी, पत्रकार राजीव लोचन साह आदि मौजूद रहे।
इन्हें मिला आनंद श्री सम्मान
प्रधान आयकर आयुक्त नरेंद्र सिंह जंगपांगी, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डाॅ. आनंद सिंह उनियाल, समाजसेवी गंगा सिंह पांगती, शौका संस्कृति को समर्पित पूजा जंगपांगी, रं संस्कृति को समर्पित अंजलि बोनाल, पर्वतीय संस्कृति को लेकर भूपाल सिंह बिष्ट, लोक गीत संगीतकार पूरन सिंह दानू, पत्रकार अमित उप्रेती, सुमित जोशी, संतोष जोशी, पवन कुंवर और दिनेश पांडेय को आनंद श्री सम्मान से नवाजा गया।
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गोष्ठी में आधार वक्ता गंगा सिंह पांगती ने अपील की कि हिमालय की लोक परंपरा को विकृत न करें। उन्होंने बागेश्वर समेत पहाड़ के मेलों, दस्तावेजों के साथ प्राचीन परंपरा और धरोहरों को बचाने की अपील की। इस अवसर पर 12 विशिष्ट जनों को आनंदश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
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हर गोविंद सुयाल इंटर काॅलेज सभागार में स्व. उप्रेती और दानवीरा जसुली बूढ़ी शौक्याणी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राम सिंह सोनाल ने लोक व्यवहार में अतिक्रमण से बचने और अपने इतिहास को जानने की अपील की। मुख्य अतिथि आयकर आयुक्त कुमाऊं नरेंद्र सिंह जंगपांगी ने सीमांत क्षेत्र और अपनी पुरानी यादों को साझा किया। अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ. सीडी सूठा ने स्मृति समारोह को ऐतिहासिक बताते हुए समाज को जोड़ने वाला बताया।
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आयोजन के दौरान रं समाज की पुष्पा दुग्ताल, जीवन सिंह दुग्ताल और साथियों ने रंग नृत्य गीतों से समा बांधा। बाल कलाकार गर्वित कांडपाल, तन्मय लोहनी, दक्ष तिवारी व साथियों ने बसंत गीत की सामूहिक प्रस्तुति दी। न्यौला पंचाचूली के संपादन में रंग लुग्बा के महान व्यक्तित्व पर केंद्रित पुस्तक का भी विमोचन हुआ। सेमिनार के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से 164 शोध पत्र शामिल हुए। आयोजन सचिव डाॅ. पंकज उप्रेती, संरक्षक फली सिंह दताल, आचार्य धीरज उप्रेती ने अतिथियों का स्वागत किया और आभार जताया। अंजनी बोनाल, डाॅ. जयश्री भंडारी, डाॅ. गोकुल सिंह सत्याल, उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक प्रो. पीसी बाराकोटी, एनसी तिवारी, पत्रकार राजीव लोचन साह आदि मौजूद रहे।
इन्हें मिला आनंद श्री सम्मान
प्रधान आयकर आयुक्त नरेंद्र सिंह जंगपांगी, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डाॅ. आनंद सिंह उनियाल, समाजसेवी गंगा सिंह पांगती, शौका संस्कृति को समर्पित पूजा जंगपांगी, रं संस्कृति को समर्पित अंजलि बोनाल, पर्वतीय संस्कृति को लेकर भूपाल सिंह बिष्ट, लोक गीत संगीतकार पूरन सिंह दानू, पत्रकार अमित उप्रेती, सुमित जोशी, संतोष जोशी, पवन कुंवर और दिनेश पांडेय को आनंद श्री सम्मान से नवाजा गया।