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परंपरा से हट कर सोच थी भविष्यद्रष्टा बीडी उनियाल की

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 02:00 AM IST
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The thinking of the prophet BD Uniyal was out of the tradition
नैनीताल। उत्तराखंड के पहले दैनिक समाचारपत्र पर्वतीय के संस्थापक संपादक बिष्णु दत्त उनियाल भविष्यद्रष्टा पत्रकार थे। आज से करीब 60 साल पहले ही उन्होंने उन विषयों पर सुझाव रख दिए थे जिन्हें बरसों बाद अमल में लाया गया और अब भी उन पर काम चल रहा है।
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नैनीताल नगर से पर्वतीय समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू करने वाले बिष्णु दत्त उनियाल के जन्म के 101वें वर्ष में उन पर लिखित पुस्तकों का विमोचन हो रहा है। ऐसे अवसर पर उनसे संबंधित ये तथ्य जानना महत्वपूर्ण है कि उनकी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालात पर कितनी मजबूत पकड़ थी। उन्होंने पृथक पर्वतीय राज्य की आवश्यकता 1954 में तब उठाई थी जब कोई भी दल या संगठन इसे लेकर मुखर नहीं था। पर्वतीय जिलों को केंद्र शासित बनाने की सलाह दी थी जिसके महत्व को लोग आज समझ पा रहे हैं।
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उनियाल ने पर्वतीय क्षेत्रों में सर्दी का हवाला देते हुए सुझाव दिया था कि इसका आगरा विश्वविद्यालय से अलग अपना विवि होना चाहिए। यहां मार्च की हाड़कंपाती सर्दी में नहीं वरन गर्मियों में परीक्षाएं हों। उन्होंने साठ के दशक में ही पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने, चार धामों के मार्गों व सुविधाओं को बढ़ा कर धार्मिक पर्यटन को विकसित करने, क्षेत्र को हवाई यातायात से जोड़ने के भी सुझाव दिए थे।
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उनियाल की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति की समझ का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण 1960 के उनके संपादकीय में मिलता है। तब सारे देश में हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे और पंचशील सिद्धांत की धूम मची हुई थी। तब उनियाल ने चीन की मंशा पर संदेह जताते हुए सीमांत क्षेत्रों में सेना की तैनाती की सलाह दी थी। उसी दौर में उन्होंने पर्वतीय क्षेत्र में बेरोजगारी को भविष्य में क्षेत्र की सुरक्षा और अप्रत्यक्ष रूप से पलायन से जोड़ते हुए यहां रोजगार विकसित करने की पैरवी की थी। उनियाल ने पर्वतीय क्षेत्रों में अन्न के बजाय फलोत्पादन और जड़ी बूटी के उत्पादन पर जोर देने और वन नीति को जनोन्मुख बनाने की भी सलाह दी थी।

वोकल फॉर लोकल और होम स्टे के दिए थे सुझाव
नैनीताल। स्व. उनियाल ने 60 के दशक में ही राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन विकास के लिए आवासीय सुविधा, होम स्टे तक का सुझाव दिया था। स्थानीय उत्पादों, वस्त्रों, खाद्य पदार्थों को पर्यटकों को उपलब्ध करा कर वोकल फॉर लोकल की सोच भी प्रदर्शित की थी।
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