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Nainital News: बेटी की विदाई में मां-बाप ने बांट दिया आंखों का उजाला

Fri, 18 Sep 2026 01:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Fri, 18 Sep 2026 01:46 AM IST
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At their daughter's farewell, the parents shared the light of their eyes.
हल्द्वानी। बेटी की अंतिम विदाई से पहले मां-बाप ने उसके हिस्से की रोशनी भी बांट दी। सड़क हादसे में घायल लामाचौड़ निवासी कंचन की मौत के बाद माता-पिता ने लोगों की सलाह पर उसके नेत्रदान का निर्णय लिया। उनका कहना था कि बेटी के जाने से उनकी जिंदगी में सूनापन आ गया है लेकिन उसकी आंखों से किसी के जीवन में रंग जरूर भरेगा। माता-पिता का यह फैसला मानवीय संवेदना की मिसाल बन गया।
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लामाचौड़ क्षेत्र में लावारिस कुत्ते को बचाने के प्रयास में गंभीर रूप से घायल 21 साल की कंचन की बुधवार को अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पीड़ित परिवार के परिचित भाजपा नेता सचिन शाह ने बताया कि कंचन की रिश्ते में बहन मोना पांडे ने परिजनों से बातचीत कर उसके नेत्रदान करने का प्रस्ताव रखा। बेटी की मौत के गम में डूबे पिता भगवती प्रसाद और मां भावना ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए नम आंखों से कंचन के नेत्रदान के लिए हामी भरी। उनका कहना था कि बेटी की कमी तो कभी पूरी नहीं हो सकती लेकिन यह सुकून रहेगा कि उसकी आंखों की रोशनी किसी की जिंदगी में उजाला भर सकेगी।
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मां ने बेटी का सामान भी जरूरतमंदों को दिया
कंचन की मां ने बेटी के जाने के बाद उसके कपड़े और घर में रखा अन्य सामान भी जरूरतमंदों को दान कर दिया। उनका कहना था कि बेटी की चीजें आंखों के सामने रहेंगी तो उसकी याद हर दिन और गहरी चुभेगी। इससे बेहतर है कि उसकी चीजें किसी जरूरतमंद के काम आएं।
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बेहद संवेदनशील थी कंचन
कंचन के सहपाठियों के मुताबिक वह बेहद संवेदनशील और मिलनसार स्वभाव की थी। हॉस्टल में किसी छात्र की तबीयत खराब होने पर वह घर से खाना बनाकर उसके लिए ले जाती थी। हर किसी से प्रेम और अपनापन उसका स्वभाव था। उसकी यही संवेदनशीलता शायद अब उसके जाने के बाद भी लोगों की जिंदगी में किसी न किसी रूप में बनी रहेगी।

दो लोगों का अंधियारा होगा दूर
हल्द्वानी। एक नेत्रदान से सामान्यत दो लोगों की आंखों की रोशनी लौट सकती है। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में संचालित कुमाऊं के एकमात्र आई बैंक ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। एसटीएच में आई बैंक की शुरुआत करीब तीन वर्ष पहले वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. जीएस तितियाल ने की थी। स्थापना से अब तक 160 से अधिक लोगों के नेत्रदान हो चुके हैं। इनमें करीब 130 कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। नेत्रदान में समय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मृत्यु के बाद परिजन जितनी जल्दी आई बैंक या संबंधित स्वास्थ्य संस्था को सूचना देते हैं, उतनी जल्दी टीम नेत्रों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। संवाद
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