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कुमाऊं के दूसरे खगोल विज्ञानी हैं एरीज के निदेशक डा. एके पांडे
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Wed, 08 Mar 2017 01:44 AM IST
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मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर में जन्मे और नैनीताल में पले बढ़े डा. अनिल कुमार पांडे कुमाऊं के ऐसे दूसरे वरिष्ठ खगोल विज्ञानी हैं जिन्होंने आर्यभट्ट प्रेक्षण एवं शोध संस्थान (एरीज) जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के निदेशक बने हैं।
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डा. पांडे का कहना है कि एरीज में चल रही परियोजनाओं को मुकाम तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है और अपने इस कार्य में वह सभी खगोल वैज्ञानिकों सहयोग लेंगे। बताते चलें कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के शासन में राज्य सरकार ने नैनीताल के समीप मनोरा पीक में उत्तर प्रदेश राज्य स्टेट आबजरवेट्री की स्थापना की।
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तब सरकार ने कुविवि के डीएसबी परिसर में गणित के विभागाध्यक्ष डा.एएन सिंह को मानद निदेशक नियुक्त किया। नवंबर 1954 में सरकार ने हावर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त डा.एमके वेनुबप्पू को निदेशक बनाया। वह वर्ष 1960 तक निदेशक रहे।
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वर्ष 1978 में नैनीताल निवासी खगोल विज्ञानी डा.एमसी पांडे को संस्थान का निदेशक बनाया गया। डा. पांडे कुमाऊं से निदेशक बनने वाले पहले खगोल विज्ञानी थे। डा. पांडे वर्ष 1978 से वर्ष 1981 तक निदेशक रहे।
इस दौरान एक साल के लिए डा.एसडी सिंघल को निदेशक के पद पर तैनात किया गया लेकिन उसके तुरंत बाद वर्ष 1982 से 1994 तक डा. एमसी पांडे फिर संस्थान के पूर्णकालिक निदेशक रहे।
वर्ष 1994 से 1996 तक प्रो. रामसागर को निदेशक का जिम्मा मिला।
अलग राज्य बनने के बाद इसे उत्तराखंड स्टेट आबजरवेट्री नाम मिला जबकि वर्ष 2004 में एरीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के अधीन हो गई। उसके बाद से डा. वहाउद्दीन संस्थान के निदेशक के पद पर रहे।
बीते दिवस सोमवार को नैनीताल में पले बढ़े डा. अनिल कुमार पांडे ने संस्थान में पूर्णकालिक निदेशक का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालने के बाद अमर उजाला से बातचीत में डा. पांडे ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1975 में नैनीताल स्थित डीएसबी कालेज से बीएससी की और इसी दौरान उन्हें एरीज में भ्रमण करने का मौका मिला तो उन्होंने खगोल वैज्ञानिक बनने की ठान ली और अपने मकसद में कामयाब रहे।
डा. पांडे ने बताया कि अब तक उनके 150 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वर्ष 1983-84 में उन्हें राष्ट्रीय तरूण खगोल वैज्ञानिक पुरस्कार और वर्ष 2001 में डा. विक्रम साराभाई अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।
पत्नी पूनम पांडे केंद्रीय विद्यालय काशीपुर में प्रधानाध्यापिका हैं जबकि इकलौता पुत्र उत्कर्ष पांडे दुबई स्थित मल्टीनेशनल कंपनी में प्रबंधक के पद पर कार्यरत है। डा. पांडे ने कहा कि चार मीटर लिक्विड मीरर टेलीस्कोप की स्थापना कराने समेत एरीज की लंबित परियोजनाओं को उनके मुकाम तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।