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लड़ने वालों से दूर रहे पढ़ने वाले
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:41 AM IST
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एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। पढ़ने वाले चुनाव लड़ने और लड़ाने वालों से अभी भी दूरी बनाए हुए हैं। एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 11 प्रतिशत कम मतदान हुआ। इस वजह से यह साफ हो गया कि अभी भी कॉलेज के 65 फीसदी से अधिक विद्यार्थी लोकतंत्र के इस अनुष्ठान में अपनी आहूति डालने को तैयार नहीं हैं। कॉलेज के कुल 12,293 में से सिर्फ 4,270 विद्यार्थियों ने ही मतदान किया। इनमें नए यानि पहले साल के विद्यार्थियों को छोड़ दिया जाए तो पुराने छात्रों का रुझान न के बराबर है।
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करीब एक महीने पहले से चुनाव को लेकर न सिर्फ कॉलेज बल्कि हल्द्वानी और आसपास के इलाकों तक चुनाव का बिगुल फूंका गया। विद्यार्थियों को रिझाने की भरसक कोशिशें हुईं। उन्हें घरों से लाने ले जाने की व्यवस्था भी उम्मीदवारों ने की। उम्मीदवारों ने रातों को जागकर वो सब प्रयास किए जिससे उन्हें अधिक से अधिक वोट मिलें। ठीक है कि इस चुनाव में एक की जीत हुई और दूसरा हारा, लेकिन छात्र राजनीति को मजबूती कतई नहीं मिल रही है।
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छात्रसंघ चुनाव में जैसा पहले होता रहा है वैसा हंगामा, मारपीट, खूनखराबा जैसा माहौल तो नहीं था, लेकिन चुनाव की पहले की छवि पढ़ने वाले बच्चों को मतदान करने के लिए कॉलेज तक नहीं खींच पाई। हालांकि कई वर्षों के बाद ऐसा नजारा देखने को मिला कि जब बिना मारपीट और खूनखराबे के मतदान हुआ होगा।
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इस बार छात्रसंघ चुनाव में कम मतदान होने का कारण भी चुनाव में हर बार मारपीट, हंगामा और खून खराबा होने की पुरानी घटनाएं ही रहा, इसी कारण पहले मतदान कर चुके पुराने छात्र-छात्राओं में इस बार मतदान करने में अधिक रुचि नहीं रही। छात्र राजनीति करने वाले अगर चाहते हैं कि कालेजों में लोकतंत्र सबल हो तो उन्हें विद्यार्थियों के बीच से भय समाप्त करना होगा। ‘बड़े’ नेताओं को भी कुछ ऐसा करना होगा जिससे कि छात्रनेताओं की कार्यप्रणाली सुधरें और विद्यार्थियों का उन पर विश्वास बढ़ सके।