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National Games: बहन ने तराशा और भाई ने दिया पदक का तोहफा, माउंटेन बाइकिंग में कमलेश ने जीता कांस्य
Tue, 11 Feb 2025 01:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
हरीश चंद्र पांडे, संवाद
हरीश चंद्र पांडे, संवाद
Updated Tue, 11 Feb 2025 01:31 PM IST
सार
बहन ने भाई को तराशा और कमलेश ने परिवार को तोहफे के रूप में कांस्य पदक दे दिया। माउंटेन बाइकिंग में पहाड़ा का डंका बजाने वाले कमलेश को उनकी बहन ने ही प्रशिक्षित किया। इस फील्ड में आने के लिए उनकी बहन पूनम और भाई राकेश ने उन्हें प्रेरित किया।
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Mountain biking
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जौहरी बनकर बहन ने भाई को तराशा और कमलेश ने परिवार को तोहफे के रूप में कांस्य पदक दे दिया। माउंटेन बाइकिंग में पहाड़ा का डंका बजाने वाले कमलेश को उनकी बहन ने ही प्रशिक्षित किया। इस फील्ड में आने के लिए उनकी बहन पूनम और भाई राकेश ने उन्हें प्रेरित किया। नैनीताल के मुक्तेश्वर निवासी कमलेश का पदक भले ही सर्विसेज के खाते में गया हो, लेकिन यहां के लोग भी इस उपलब्धि से गौरवान्वित हैं।
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माउंटेन बाइकिंग की पुरुष वर्ग की प्रतियोगिता में कांस्य पदक विजेता रहे कमलेश राणा ने बताया कि वह वर्ष 2014 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। नौकरी में आने के बाद राकेश राणा और पूनम राणा ने उन्हें माउंटेन बाइकिंग से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि शुरुआत में उनका मन नहीं था, लेकिन भाई और बहन के प्रोत्साहित करने के बाद वर्ष 2018 में माउंटेन बाइकिंग से जुड़कर साइकिल को अपने हमसफर बनाया। कमलेश ने बताया कि वह वर्ष 2020 से अब तक एमटीबी नेशनल चैंपियनशिप प्रतियोगिता में छह गोल्ड और दो सिल्वर जीत चुके हैं। चार बार एशियन चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर चुके हैं। कमलेश ने कहा कि वह फ्रांस, नेपाल, थाइलैंड, साउथ कोरिया, टर्की, लेबनान आदि देशों में आयोजित रेस में हिस्सा ले चुके हैं। कमलेश ने कहा कि माउंटेन बाइकिंग के शौकीन पहाड़ के युवाओं को प्रोत्साहित कर इस फील्ड में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।
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मुझे उत्तराखंडी होने पर गर्व
कमलेश ने बताया कि बहन से कोचिंग लेने का उन्हें काफी फायदा मिलता है। कहा, आमतौर पर कोच से बात करने में हिचक होती है, लेकिन बहन से हर समय मिलने वाले सपोर्ट से उन्होंने अपने खेल को निखारा और रिजल्ट आपके सामने है। छोटी-छोटी कमियों को दूर कराने पर भी बहन पूरा ध्यान देती हैं। कमलेश ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं और अब भी अपनी मातृभूमि से जुड़े हैं। कमलेश के पिता ध्यान बहादुर राणा भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं और माता कुंती राणा गृहिणी हैं।
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भाई के और अच्छा करने की थी उम्मीद : पूनम
कमलेश की छोटी बहन और कोच पूनम राणा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में बतौर कोच तैनात हैं। भाई के पदक जीतने के बाद बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें अपने भाई से प्रतियोगिता में और अच्छा करने की उम्मीद थी। हालांकि कांस्य पदक जीतकर भी उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। कहा कि वर्तमान में वह दो महिला और छह पुरुष खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रही थीं। उनके अंडर में प्रैक्टिस करने वाले पुरुष वर्ग के दो और महिला वर्ग की एक खिलाड़ी ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किया है।