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Nainital News: ज्योलीकोट जल संकट के बीच सीनियर केमिस्ट का इस्तीफा
Mon, 14 Sep 2026 01:26 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:26 AM IST
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नैनीताल। ज्योलीकोट में जलजनित बीमारियों के गंभीर होते मामले के बीच नैनीताल जल संस्थान की प्रयोगशाला के सीनियर केमिस्ट योगेंद्र पाल के इस्तीफे से विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 11 वर्षों से प्रयोगशाला में सेवाएं दे रहे योगेंद्र ने निजी सुरक्षित भविष्य, विभागीय दबाव और ज्योलीकोट प्रकरण से व्यथित होकर नौकरी छोड़ने की बात कही है।
जल संस्थान की मल्लीताल पंप हाउस के समीप स्थित प्रयोगशाला में नियमित रूप से पेयजल के नमूनों की जांच की जाती है। प्रयोगशाला में योगेंद्र पाल के अलावा ज्योलीकोट निवासी पंकज कुमार भी केमिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। पंकज करीब तीन वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। दोनों कर्मचारी जल संस्थान के नियमित कर्मचारी नहीं बल्कि यूकोस्ट के माध्यम से कार्यरत हैं। वहीं विभागीय सेवा में दिसंबर 2025 में ज्योति आर्या ने भी ज्वाइन किया है। सीनियर केमिस्ट होने के कारण प्रयोगशाला में जांच संबंधी कार्य योगेंद्र के नेतृत्व में संचालित होता था।
इस्तीफे के कारणों पर पूछने पर योगेंद्र ने बताया कि ज्योलीकोट प्रकरण से मन व्यथित होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। निजी भविष्य की सुरक्षा और विभागीय दबाव भी वजह हैं। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी के कोर्स की परीक्षा के लिए अवकाश नहीं मिलने से भी वह व्यथित थे। कई बार दोयम दर्जे का व्यवहार किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
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विभाग ने लापरवाही की शिकायतों का दिया हवाला
सीनियर केमिस्ट योगेंद्र के खिलाफ कार्य में लापरवाही समेत अन्य के लिए पूर्व में भी ईई स्तर के अधिकारियों ने कई शिकायतें की हैं। विभागीय कर्मचारी समेत संगठन स्तर पर भी दिक्कतें हो चुकी है। ज्योलीकोट निवासी केमिस्ट पंकज की बीमारी को देखते हुए संवेदनशील समय में लंबी छुट्टी के लिए मैंने इन्कार जरूर किया था। योगेंद्र के स्थान पर रानीखेत से केमिस्ट यहां स्थानांतरित हो चुके हैं। - अनीष पिल्लई अधिशासी अभियंता जल संस्थान
ज्योलीकोट में पानी वितरण टैंक में क्लोरीनेटर लगा
ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट एवं इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में जल जनित रोगों के प्रकोप के बाद जल संस्थान भी अलर्ट हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के दखल एवं जिला प्रशासन के निर्देश के बाद विभाग को जरूरी काम याद आने लगे हैं। 15 वर्ष से उपयोग में आ रहे जल संग्रह और वितरण टैंक में रविवार को क्लोरिनेशन के लिए क्लोरीनेटर लगाया गया जिसे सुचारु किया जा चुका है। ग्रामीणों ने नियमित चेकिंग आदि की मांग की है। संवाद
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जल संस्थान की मल्लीताल पंप हाउस के समीप स्थित प्रयोगशाला में नियमित रूप से पेयजल के नमूनों की जांच की जाती है। प्रयोगशाला में योगेंद्र पाल के अलावा ज्योलीकोट निवासी पंकज कुमार भी केमिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। पंकज करीब तीन वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। दोनों कर्मचारी जल संस्थान के नियमित कर्मचारी नहीं बल्कि यूकोस्ट के माध्यम से कार्यरत हैं। वहीं विभागीय सेवा में दिसंबर 2025 में ज्योति आर्या ने भी ज्वाइन किया है। सीनियर केमिस्ट होने के कारण प्रयोगशाला में जांच संबंधी कार्य योगेंद्र के नेतृत्व में संचालित होता था।
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इस्तीफे के कारणों पर पूछने पर योगेंद्र ने बताया कि ज्योलीकोट प्रकरण से मन व्यथित होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। निजी भविष्य की सुरक्षा और विभागीय दबाव भी वजह हैं। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी के कोर्स की परीक्षा के लिए अवकाश नहीं मिलने से भी वह व्यथित थे। कई बार दोयम दर्जे का व्यवहार किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
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विभाग ने लापरवाही की शिकायतों का दिया हवाला
सीनियर केमिस्ट योगेंद्र के खिलाफ कार्य में लापरवाही समेत अन्य के लिए पूर्व में भी ईई स्तर के अधिकारियों ने कई शिकायतें की हैं। विभागीय कर्मचारी समेत संगठन स्तर पर भी दिक्कतें हो चुकी है। ज्योलीकोट निवासी केमिस्ट पंकज की बीमारी को देखते हुए संवेदनशील समय में लंबी छुट्टी के लिए मैंने इन्कार जरूर किया था। योगेंद्र के स्थान पर रानीखेत से केमिस्ट यहां स्थानांतरित हो चुके हैं। - अनीष पिल्लई अधिशासी अभियंता जल संस्थान
ज्योलीकोट में पानी वितरण टैंक में क्लोरीनेटर लगा
ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट एवं इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में जल जनित रोगों के प्रकोप के बाद जल संस्थान भी अलर्ट हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के दखल एवं जिला प्रशासन के निर्देश के बाद विभाग को जरूरी काम याद आने लगे हैं। 15 वर्ष से उपयोग में आ रहे जल संग्रह और वितरण टैंक में रविवार को क्लोरिनेशन के लिए क्लोरीनेटर लगाया गया जिसे सुचारु किया जा चुका है। ग्रामीणों ने नियमित चेकिंग आदि की मांग की है। संवाद