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नदियों में खनन सर्वे के नाम पर खिलवाड़ की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:24 AM IST
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हल्द्वानी। नदियों में खनन मात्रा निर्धारण के नाम पर खिलवाड़ की तैयारी है। शासन ने कुमाऊं की नदियों में खान विभाग द्वारा ‘रैपिड सर्वे’ करने का निर्देश दिया है। अब नैनीताल जिले में एक भू-वैज्ञानिक के ऊपर ही कुमाऊं की गौला कोसी, दाबका नदी के अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा होने वाले खनन क्षेत्र सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही नहीं, सर्वे कर सभी नदियों की रिपोर्ट भी 15 दिनों के अंदर देने को कहा है। ऐसे में सर्वे के नाम पर क्या होगा? यह खुद-ब-खुद समझा जा सकता है।
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की खनन शर्तों में कोसी, दाबका में हर साल खनन मात्रा के लिए सर्वे का निर्देश है, लेकिन गौला में हर साल सर्वे करने का निर्देश नहीं है। 2015-अप्रैल में जब तराई पूर्वी वन प्रभाग ने सेंट्रल स्वॉयल वाटर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट आफ इंडिया देहरादून (सीएसडब्ल्यूआरटीआई) के अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर 42 लाख घनमीटर खनिज निकासी पूरी होने के बाद खनन रुकवा दिया था, तो शासन तक में खलबली मच गई थी। बाद में मंत्रालय द्वारा 10 साल के लिए तय 54 लाख घनमीटर के हिसाब से ही खनन कराने का निर्देश दिया।
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अब शासन ने हर नदियों में खनन मात्रा निर्धारण करने के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया है। यह जिम्मेदारी खान विभाग को सौंपी गई है। स्थिति यह है कि नैनीताल जिले में ही सबसे बड़ा खनन कोसी, दाबका और गौला में होता है, वहां पर अध्ययन करने के लिए केवल एक वैज्ञानिक है। ऐसे में एक भू-वैज्ञानिक को 1475 हेक्टेयर गौला और इसी तरह कोसी, दाबका में 650 हेक्टेयर में खनन क्षेत्र की जांच करने और मात्रा निर्धारण का काम करना है। इसके अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा भी जहां पर खनन हो रहा है, उसकी भी जांच करनी है। बताया जाता है कि इन सभी की रिपोर्ट भी 15 दिनों के अंदर शासन को भेजनी है।
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बताया जाता है कि इसमें गौला में सर्वे के लिए वैज्ञानिक गए थे, कुछ गेट को देख पाये। लेकिन वन विभाग द्वारा खनन क्षेत्र में सीमांकन पीलर आदि नहीं लगे होने के कारण वापस लौट आए हैं। अभी सर्वे होना बाकी है। पूर्व में नदियों में खनन मात्रा सर्वे का काम सीएसडब्ल्यूआरटीआई के माध्यम से होता था, जिसके पास वैज्ञानिकों की टीम, अन्य स्टाफ और संसाधन भी होते थे।
अब एक भू-वैज्ञानिक नदियों में खनन मात्रा का निर्धारण कितने बेहतर और गुणवत्ता युक्त कर सकेगा? यह समझा जा सकता है। वन निगम आरएम एमपीएस रावत कहते हैं कि शासन के निर्देश पर नदियों में खनन मात्रा का सर्वे कराया जा रहा है। एक बार गौला में सर्वे का प्रयास किया गया था, लेकिन तकनीकी अड़चन के कारण पूरा नहीं हो सका था। जल्द ही नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा।