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पुरातात्विक महत्व के स्थान हमारी धरोहर हैं, इन्हें संजोना जरूरी: पद्मश्री मठपाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 11:45 PM IST
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Places of archaeological importance are our heritage, it is necessary to cherish them: Padmashree Mathpal
हल्द्वानी। पुरातत्वविद् पद्मश्री डा. यशोधर मठपाल ने कहा कि पुरातात्विक महत्व के स्थान हमारी धरोहर हैं जो मानव विकास के क्रमों को दिखाते हैं। इन्हें बचाने की पहल की जानी चाहिए। एक मकान बनाने से एक पुस्तक लिखना ज्यादा बेहतर है। साहित्यकारों को अपनी लोक परंपराओं को जानना चाहिए और लोक पक्ष को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए। युवा परंपराओं को भूल रहे हैं, इस पर मंथन करने की जरूरत है।
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डॉ. मठपाल हल्द्वानी साहित्य महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। शनिवार को रामपुर रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश भेजकर शुभकामनाएं दीं।
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महोत्सव के पहले सत्र में ‘सोशल मीडिया का बदलता स्वरूप’ विषय पर मोडरेटर युवा लेखक वैभव पांडे के साथ चर्चा करते हुए प्रसिद्ध एथिकल हैकर अंशुल सक्सेना ने कहा कि सोशल मीडिया में बड़ा परिवर्तन आया है। शुरू में लोग लाइक और पोस्ट डालने पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन अब यहां मुद्दों पर चर्चा होती है, लोग अपने विचार रखते हैं। लोगों को सूचना तकनीक के इस दौर में सोच समझकर लिखना, बोलना चाहिए।
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वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि वर्तमान में कथा, उपन्यास से अलग अब यात्रा वृत्तांत और संस्मरण पर ज्यादा लिखा जा रहा है। लेखक डॉ. चंद्रशेखर जोशी और पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रमोद साह ने कहानी उपन्यास और गद्य पर चर्चा की। ‘भारतीय इतिहास और विवाद’ सत्र में लेखक सबरीश पीए ने वैदिक काल से आधुनिक काल तक भारतीय इतिहास में विज्ञान के प्रभाव पर चर्चा की। कहा कि अंग्रेजों ने भारत में कानून के दम पर भारतीय विज्ञान परंपरा और विद्या केंद्रों को नष्ट किया और विदेशी ज्ञान को प्रोत्साहित किया। शांतनु गुप्ता ने कहा कि भारत की विरासत को बचाना मानवता के लिए आवश्यक है। सरकारों का काम सभ्यता, संस्कृति और विरासत को बचाना भी है। वरिष्ठ पत्रकार हितेश शंकर ने राष्ट्रवाद पर विचार रखे।
इनके अलावा अलग-अलग विषयों पर कंचन पंत, मंजू पांडे उदिता, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष सिंह, अनुराग पुनेठा, अंबुज और प्रीति बिष्ट, कथाकार और लेखक लक्ष्मण सिंह बटरोही, मनोज पांडे और हेम पंत आदि ने भी विचार रखे। मंच संचालन स्वाति
कपूर और प्रीति बिष्ट ने किया।
साहित्य महोत्सव में ये लोग रहे मौजूद :
कार्यक्रम को सफल बनाने में दिनेश मानसेरा, भूमेश अग्रवाल, प्रवींद्र रौतेला, समित टिक्कू, अश्वनी सारस्वत, विवेक अग्रवाल, डीपीएस की प्रधानाचार्य रंजना साही, अवनीश राजपाल, दिनेश पांडे, राजीव वाही, उमंग वासुदेवा, राजीव बग्गा, मनमोहन जोशी, अर्पिता जोशी, हिमानी मेर, मनीषा शाह आदि का विशेष योगदान रहा। अतिथियों को पहाड़ी टोपी, स्मृति चिह्न और पेंटिंग्स भेंट की गईं, जबकि महिला अतिथियों को पिछौड़े भेंट किए गए।
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अब साइबर तकनीक का समय है, स्कूलों में शुरू हो पाठ्यक्रम : अंशुल
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी। रामपुर रोड स्थित डीपीएस में हुए साहित्य महोत्सव में प्रसिद्ध एथिकल हैकर अंशुल सक्सेना ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। दुनिया में अब दो देशों के बीच कहीं भी युद्ध होता है तो साइबर युद्ध पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। डिप्लोमेसी में बदलाव आया है और आज प्रत्येक देश में उनकी हैकर टीम तैयार रहती है जो कभी भी दुश्मन देश से होने वाली क्रिया के बदले प्रतिक्रिया देती है। अब जो देश साइबर वार में महारत हासिल करेगा वही आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारत में लोगों को साइबर सुरक्षा को लेकर सचेत होना जरूरी है। बाकायदा स्कूलों में भी एक विषय के रूप में साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह हैकर के रूप में साइबर मामले सुलझाने में मदद करते हैं। भारत पहले रक्षात्मक था, अब कुछ सालों में आक्रामक हो गया है इसलिए दुश्मन देश भी हमला करने से पहले सोचता है। बच्चों के सवालों का जवाब देते हुए अंशुल सक्सेना ने कहा कि देशभक्ति के नाम पर चीजें खुद से आती हैं। अकाउंट हैक करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आईडी और अकाउंट दोनों में अंतर होता है और लोगों को इसका पता होना चाहिए।
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सौ के बजाय दो किताबें पढ़ें लेकिन स्तरीय हों
हल्द्वानी। पीसीएस अधिकारी और साहित्यकार ललित मोहन रयाल ने कहा कि हेडलाइन पर लेखन नहीं होता, प्रवृत्ति पर लिखें जो दशकों तक चलेगा। मॉडरेटर प्रमोद साह से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्वता हासिल करनी है तो पढ़ना पड़ेगा। युवा सौ किताबों की जगह सिर्फ दो किताबें ही पढ़ें लेकिन अच्छी और स्तरीय किताबों पर ध्यान केंद्रित करें। पढ़ने से तनाव तो दूर होता ही है, समस्याओं का समाधान भी निकलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को समकालीन घटनाओं पर चौकन्ना रहने की जरूरत है। खेल, देश, दुनिया की खबरों पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि जो भी लिखें वह सार्वभौमिक हो, स्पष्ट हो और लोकमान्य हो।
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स्कूली बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां
महोत्सव के दौरान डीपीएस स्कूल के बच्चों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के बाद कुमाउंनी, गढ़वाली लोक गीतों पर जमकर नृत्य किया। अतिथियों के आगमन के समय स्कूली बच्चों ने प्रवेश द्वार में रोली तिलक लगाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान कुमाउंनी छोलिया नृत्य की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।

पुस्तक प्रदर्शनी लगाई
कार्यक्रम स्थल में पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। देश-विदेश के नामी लेखकों के अलावा स्थानीय लेखकों की पुस्तकों को लोगों ने चाव से पढ़ा और उन्हें खरीदा।

हल्द्वानी रामपुर रोड स्थित डीपीएस स्कूल में आयोजित हल्द्वानी साहित्य महोत्सव 2022 में उपस्थित लोग

हल्द्वानी रामपुर रोड स्थित डीपीएस स्कूल में आयोजित हल्द्वानी साहित्य महोत्सव 2022 में उपस्थित लोग

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