{"_id":"637282c486342078642efb03","slug":"petition-challenging-illegal-appointments-dismissed-nainital-news-hld482004814","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में अवैध नियुक्तियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने इसका आधार याचिका को सर्विस से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसमें जनहित याचिका नहीं हो सकती। हालांकि कोर्ट ने यह कहा कि जो अभ्यर्थी इससे प्रभावित हैं वे हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में 13 लोगों की नियुक्तियां अवैध तरीके से की गई हैं। इन नियुक्तियों को करने में यूजीसी के नियमों का पालन नहीं किया गया है इसलिए इन्हें निरस्त किया जाए।
दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया कि विश्वविद्यालय में कोई भी अवैध नियुक्तियां नहीं हुई है, जो नियुक्तियां हुई है वह नियमों के तहत ही हुई हैं। यह भी कहा गया कि सर्विस से जुड़े मामलों में जनहित याचिका दायर नहीं हो सकती इसलिए इस जनहित याचिका को निरस्त किया जाय। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में 13 लोगों की नियुक्तियां अवैध तरीके से की गई हैं। इन नियुक्तियों को करने में यूजीसी के नियमों का पालन नहीं किया गया है इसलिए इन्हें निरस्त किया जाए।
विज्ञापन
दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया कि विश्वविद्यालय में कोई भी अवैध नियुक्तियां नहीं हुई है, जो नियुक्तियां हुई है वह नियमों के तहत ही हुई हैं। यह भी कहा गया कि सर्विस से जुड़े मामलों में जनहित याचिका दायर नहीं हो सकती इसलिए इस जनहित याचिका को निरस्त किया जाय। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन