नैनीझील को मिला नया जीवन: पंतनगर विवि ने छोड़ीं 21 हजार मछलियों की तीन प्रजातियां, पारिस्थितिकी में आएगा सुधार
नैनीझील की पारिस्थितिकी सुधारने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग ने डीडीए सचिव मनीष कुमार के नेतृत्व में तल्लीताल फांसी गधेरा क्षेत्र से झील में 15,000 सिल्वर कार्प, 5,000 गोल्डन महाशीर और 1,000 बुनियस मछलियां छोड़ीं।
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नैनीताल शहर के नैनीझील की पारिस्थितिकी को बनाए रखने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग की ओर से झील में सिल्वर कार्प, गोल्डन महाशीर व बुनियस मछली के बीज डाले गए। ये मछलियां जलीय पारिस्थितिकी में सुधार लाने के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
बुधवार को पंतनगर विश्वविद्यालय मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों व डीडीए सचिव मनीष कुमार के नेतृत्व में टीम नैनीताल पहुंची। टीम ने तल्लीताल फांसी गधेरा क्षेत्र से झील में सिल्वर कार्प, गोल्डन महाशीर व बुनियस मछली छोड़ी।
इस दौरान पंतनगर विवि के डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि झील की जलीय पारिस्थितिकी के स्तर को ठीक करने के लिए लगातार झील में मछलियां डाली जाती हैं। कुछ ही वर्षों में झील में कॉमन कार्प मछली की संख्या बेहद बढ़ने लगी, जिसे नियंत्रित करने के लिए कॉमन कार्प व बिग हेड प्रजाति की मछलियों को निकालने के साथ ही नई प्रजातियां छोड़ी जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि नैनीझील में 15,000 सिल्वर कार्प, 5,000 गोल्डन महाशीर व 1,000 बुनियस छोड़ी गई। सिल्वर कार्प झील की काई व खरपतवार को कम करेंगी, जबकि गोल्डन महाशीर जीवित जीवों को खाकर झील को साफ बनाए रखने में मदद करेगी।