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Nainital News: ईओ नैनीताल को निलंबित करने के आदेश, पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज
Wed, 18 Oct 2023 02:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 18 Oct 2023 02:22 AM IST
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प्रतीकात्मक।
नैनीताल। हाईकोर्ट ने नैनीताल फ्लैट मैदान में नियम विरुद्ध लगे झूलों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए नैनीताल पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी के अधिकार सीज कर अधिशासी अधिकारी ईओ आलोक उनियाल को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति इरशाद हुसैन की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर इन अनियमितताओं की जांच के आदेश भी दिए हैं। अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को भी मामले की जांच कर रिपोर्ट दस दिन में कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने अधिशासी अधिकारी से कहा है कि वह 50000 रुपये याचिकाकर्ता रमेश सजवाण को भुगतान करें। कोर्ट के आदेश पर पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी मंगलवार को भी कोर्ट में पेश हुए थे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार फ्लैट में झूलों का टेंडर नगरपालिका नैनीताल ने 1 अक्तूबर से 5 नवंबर तक के लिए देहरादून के रमेश सजवाण को करीब 6.75 लाख रुपये में दिया था। इसके लिए किशन पाल भारद्वाज ने भी आवेदन किया था, जिसे पालिका ने निरस्त कर दिया था। पालिका ने यह प्रक्रिया बिना निविदा आमंत्रित किए ही कर दी थी। इसे किशन भारद्वाज ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में 10 अक्तूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए नगर पालिका नैनीताल को उसी दिन झूले हटाने के निर्देश दिए थे और 12 अक्तूबर को कोर्ट के आदेश का पालन करने की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था लेकिन फ्लैट से झूलों को 12 अक्तूबर तक भी पूरी तरह नहीं हटाया गया था। इस पर कोर्ट ने पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी व अधिशासी अधिकारी आलोक उनियाल को कोर्ट में तलब किया और उन्हें नियमविरुद्ध झूले संचालन करने पर कड़ी फटकार लगाई। उन्हें कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट ने खेल मैदान में छह सप्ताह तक व्यावसायिक गतिविधियां करने की अनुमति देने पर गंभीर रुख अपनाते हुए इसका स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया। कोर्ट ने पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताएं होने का संज्ञान लिया। काशीपुर निवासी ठेकेदार कृष्ण भारद्वाज के अधिवक्ता पीयूष गर्ग ने बताया कि न्यायालय में पिछले दिनों उनके मुवक्किल ने तीन रिट याचिकाएं दायर कर कहा था कि उनके टेंडर को नन्दा देवी और दूर्गा पूजा महोत्सव से इरादतन बाहर किया गया। कहा गया कि इसमें दूसरे ठेकेदार को नियमविरूद्व तरीके से ठेका दिया गया।
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कोर्ट ने अधिशासी अधिकारी से कहा है कि वह 50000 रुपये याचिकाकर्ता रमेश सजवाण को भुगतान करें। कोर्ट के आदेश पर पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी मंगलवार को भी कोर्ट में पेश हुए थे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार फ्लैट में झूलों का टेंडर नगरपालिका नैनीताल ने 1 अक्तूबर से 5 नवंबर तक के लिए देहरादून के रमेश सजवाण को करीब 6.75 लाख रुपये में दिया था। इसके लिए किशन पाल भारद्वाज ने भी आवेदन किया था, जिसे पालिका ने निरस्त कर दिया था। पालिका ने यह प्रक्रिया बिना निविदा आमंत्रित किए ही कर दी थी। इसे किशन भारद्वाज ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में 10 अक्तूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए नगर पालिका नैनीताल को उसी दिन झूले हटाने के निर्देश दिए थे और 12 अक्तूबर को कोर्ट के आदेश का पालन करने की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था लेकिन फ्लैट से झूलों को 12 अक्तूबर तक भी पूरी तरह नहीं हटाया गया था। इस पर कोर्ट ने पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी व अधिशासी अधिकारी आलोक उनियाल को कोर्ट में तलब किया और उन्हें नियमविरुद्ध झूले संचालन करने पर कड़ी फटकार लगाई। उन्हें कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया।
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हाईकोर्ट ने खेल मैदान में छह सप्ताह तक व्यावसायिक गतिविधियां करने की अनुमति देने पर गंभीर रुख अपनाते हुए इसका स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया। कोर्ट ने पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताएं होने का संज्ञान लिया। काशीपुर निवासी ठेकेदार कृष्ण भारद्वाज के अधिवक्ता पीयूष गर्ग ने बताया कि न्यायालय में पिछले दिनों उनके मुवक्किल ने तीन रिट याचिकाएं दायर कर कहा था कि उनके टेंडर को नन्दा देवी और दूर्गा पूजा महोत्सव से इरादतन बाहर किया गया। कहा गया कि इसमें दूसरे ठेकेदार को नियमविरूद्व तरीके से ठेका दिया गया।
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