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स्कूल खोल दिए, परेशानियों से नाता तोड़ा
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स्कूल खोल दिए, परेशानियों से नाता तोड़ा
बसें नही चलने से बच्चों सहित अभिभावक परेशान
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। कोविड नियमों का सख्ती से पालन करने की शर्त के साथ सरकार ने विद्यालय खोलने के आदेश तो दे दिए लेकिन बच्चों की सुरक्षा, उन्हें विद्यालय भेजने की व्यवस्था, विद्यालयों की भूमिका आदि को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए। आधी अधूरी तैयारी के साथ विद्यालयों को खोले जाने से बच्चे, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन परेशान हैं।
स्कूल खुलने पर बच्चों की जिद के आगे अभिभावक विवश हैं और तमाम दिक्कतों को झेलते हुए नियमित रूप से बच्चों को विद्यालय लाने और ले जाने को मजबूर हैं। विद्यालयों में नाममात्र की उपस्थिति है। बच्चों की उपस्थिति कम होने से स्कूली बसों का संचालन भी नहीं हो पा रहा है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रवींद्र सिंह रौतेला का कहना है कि स्कूल खोलने से पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच सामंजस्य बिठाना चाहिए था। स्कूलों पर जबरन पढ़ाने का दबाव है। बिना ट्रांसपोर्टेशन के बच्चों को स्कूल छोड़ना अभिभावक की मजबूरी है।
अभिभावकों की पीड़ा
बिना वैक्सीन के बच्चे स्कूल बुला लिए हैं। स्कूलों में कोरोना के बचाव के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हैं। बसें नहीं चलने से अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्कूल खोलने से पहले बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए था।
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- पंडित मदन मोहन जोशी, संयोजक अभिभावक संघर्ष समिति।
कोट
बच्चों को वैक्सीन लगाए बिना स्कूल खोलना खतरे से कम नहीं है। बच्चों को स्कूल लाने ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। स्कूल प्रबंधन पल्ला झाड़ रहा है। अभिभावक परेशान हैं। अभिभावक बच्चों की जिद के आगे बेबस है।
- मुकुल बल्यूटिया, अभिभावक।
आधी अधूरी तैयारी के साथ विद्यालय खोल दिए गए हैं ताकि अभिभावकों से फीस वसूली जा सके। न तो ट्रांसपोर्ट की कोई व्यवस्था की गई है और न ही कोरोना से बचाव के कोई उपाय किए गए हैं। विद्यालय बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लें।
- उमेश चंद्र कबड़वाल, अभिभावक।
पीएसए का पक्ष
सरकार ने स्कूल खोलने के लिए तो कह दिया लेकिन परेशानी का हल नहीं निकाला। ट्रांसपोर्टेशन फीस नहीं ले सकते। शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाने के लिए मजबूर किया गया है। कक्षा में बच्चों उपस्थिति भी 10 से 15 फीसदी है। सरकार के आदेशों के आगे प्रबंधन स्कूल खोलने को विवश हैं।
- मणिपुष्पक जोशी, महासचिव, पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
इनसेट ... जरूरत होने पर लगाएं
हल्द्वानी में पब्लिक स्कूलों की संख्या: करीब 60
कुल स्कूल बसें: 600
प्रति विद्यालय बसों से विद्यालय आने वाले औसत बच्चों की संख्या 500
ट्रांसपोर्ट के जरिए विद्यालय जाने वाले बच्चों की संख्या: करीब 30 हजार।
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बसें नही चलने से बच्चों सहित अभिभावक परेशान
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। कोविड नियमों का सख्ती से पालन करने की शर्त के साथ सरकार ने विद्यालय खोलने के आदेश तो दे दिए लेकिन बच्चों की सुरक्षा, उन्हें विद्यालय भेजने की व्यवस्था, विद्यालयों की भूमिका आदि को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए। आधी अधूरी तैयारी के साथ विद्यालयों को खोले जाने से बच्चे, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन परेशान हैं।
स्कूल खुलने पर बच्चों की जिद के आगे अभिभावक विवश हैं और तमाम दिक्कतों को झेलते हुए नियमित रूप से बच्चों को विद्यालय लाने और ले जाने को मजबूर हैं। विद्यालयों में नाममात्र की उपस्थिति है। बच्चों की उपस्थिति कम होने से स्कूली बसों का संचालन भी नहीं हो पा रहा है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रवींद्र सिंह रौतेला का कहना है कि स्कूल खोलने से पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच सामंजस्य बिठाना चाहिए था। स्कूलों पर जबरन पढ़ाने का दबाव है। बिना ट्रांसपोर्टेशन के बच्चों को स्कूल छोड़ना अभिभावक की मजबूरी है।
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अभिभावकों की पीड़ा
बिना वैक्सीन के बच्चे स्कूल बुला लिए हैं। स्कूलों में कोरोना के बचाव के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हैं। बसें नहीं चलने से अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्कूल खोलने से पहले बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए था।
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- पंडित मदन मोहन जोशी, संयोजक अभिभावक संघर्ष समिति।
कोट
बच्चों को वैक्सीन लगाए बिना स्कूल खोलना खतरे से कम नहीं है। बच्चों को स्कूल लाने ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। स्कूल प्रबंधन पल्ला झाड़ रहा है। अभिभावक परेशान हैं। अभिभावक बच्चों की जिद के आगे बेबस है।
- मुकुल बल्यूटिया, अभिभावक।
आधी अधूरी तैयारी के साथ विद्यालय खोल दिए गए हैं ताकि अभिभावकों से फीस वसूली जा सके। न तो ट्रांसपोर्ट की कोई व्यवस्था की गई है और न ही कोरोना से बचाव के कोई उपाय किए गए हैं। विद्यालय बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लें।
- उमेश चंद्र कबड़वाल, अभिभावक।
पीएसए का पक्ष
सरकार ने स्कूल खोलने के लिए तो कह दिया लेकिन परेशानी का हल नहीं निकाला। ट्रांसपोर्टेशन फीस नहीं ले सकते। शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाने के लिए मजबूर किया गया है। कक्षा में बच्चों उपस्थिति भी 10 से 15 फीसदी है। सरकार के आदेशों के आगे प्रबंधन स्कूल खोलने को विवश हैं।
- मणिपुष्पक जोशी, महासचिव, पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
इनसेट ... जरूरत होने पर लगाएं
हल्द्वानी में पब्लिक स्कूलों की संख्या: करीब 60
कुल स्कूल बसें: 600
प्रति विद्यालय बसों से विद्यालय आने वाले औसत बच्चों की संख्या 500
ट्रांसपोर्ट के जरिए विद्यालय जाने वाले बच्चों की संख्या: करीब 30 हजार।